अभिजात कांडपाल (हल्द्वानी)। 2003 में नैनीताल के अधिवक्ता रवि वार्ष्णेय हत्याकांड के बाद सनसनी फैल गई थी। दरअसल लखनऊ जाने के बाद रवि लापता हो गया था। उसकी खोजबीन की गई मगर पता नहीं चल सका। आठ दिन बाद उसका शव उन्नाव स्थित खड़िया फैक्ट्री से बरामद किया गया तो सब सन्न रह गए थे। इस मामले में चार अभियुक्त पहले ही बरी हो गए थे। अब प्रकाश पांडे उर्फ पीपी और भूपेंद्र सिंह बोरा उर्फ भुप्पी को कोर्ट ने बरी कर दिया है।
कौन है पीपी
प्रकाश पांडे उर्फ बंटी पांडे उर्फ पीपी हल्द्वानी का रहने वाला है। 15 वर्ष पहले उसने एक हत्या करके अपराध की दुनिया में कदम रखा था। वह 2007 में मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में भी शामिल रहा। इसके दोष में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उत्तराखंड में ही उस पर करीब दस से ज्यादा हत्याएं करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार पीपी एक बार हल्द्वानी जेल से भी फरार हो चुका है। इसके बाद वह अंडरवर्ल्ड की दुनिया में सक्रिय हो गया। उस पर फिल्मी सितारों और फिल्म निर्माताओं से भी रंगदारी मांगने का आरोप है। नवंबर 2010 में उसे वियतनाम से इंटरपोल ने गिरफ्तार किया। मुंबई में उस पर मकोका लगा दिया गया। पीपी मुंबई पुलिस की वांटेड लिस्ट में 36वें नंबर पर था। पीपी पर अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के लिए काम करने का आरोप है। बाद में पैसों को लेकर पीपी और राजन के बीच खटास आ गई थी।
कौन है भूप्पी
कुख्यात गैंगस्टर भूपेंद्र सिंह बोरा उर्फ भूप्पी मूलत: नैनीताल का रहने वाला है। उस पर कई सालों तक अंडर वर्ल्ड डॉन पीपी के लिए काम करने का आरोप है। उस पर आरोप है कि वह व्यवसायियों को धमकी देकर वसूली करता था। 2010 तक उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, दंगा करने, अवैध वसूली करने और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत 15 मामले दर्ज थे। इनमें से 12 मामले हल्द्वानी में, एक नैनीताल में और दो दिल्ली में दर्ज हैं। आठ मामलों में उसकी गिरफ्तारी हो चुकी थी, लेकिन हर बार वह किसी तरह जेल से निकलने में कामयाब रहा और फरार हो गया। आठों मामलों में उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी थे और वह भगोड़ा भी घोषित था। भूपी आजकल सितारगंज जेल में बंद है। पुलिस के मुताबिक भूपी छोटा राजन का शार्प शूटर भी था।