हल्द्वानी। कुमाऊं में पहली बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के जनता दरबार में फरियादियों की भीड़ जुटी। अव्यवस्थाओं के बीच जनता दरबार में 474 लोगों ने मुख्यमंत्री तक अपनी बात रखी मगर बमुश्किल करीब दो सौ लोगों की समस्याओं का निस्तारण हो पाया। बाद में मुख्यमंत्री ने बाकी लोगों की समस्याएं उनके बीच जाकर ही सुनीं। जनता दरबार करीब ढाई घंटे चला।
गुरुवार को श्याम विहार स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित जनता दरबार में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे। फरियादियों की भीड़ से भाजपा कार्यालय परिसर खचाखच भरा हुआ था। पूर्वाह्न 11 बजे जैसे ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भाजपा कार्यालय के कांफ्रेंस हॉल में जनता की शिकायतों को सुनने पहुंचे तो अव्यवस्था फैल गई। मुख्यमंत्री को खुद माइक संभालना पड़ा और फरियादियों के अलावा बाकी लोगों को कांफ्रेंस हाल से बाहर जाने को कह दिया। इसके बाद कुछ व्यवस्था ठीक हो पाई और मुख्यमंत्री के सामने 20-20 लोगों को भेजा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा राजधानी में जनता दर्शन कार्यक्रम आयोजित कर जन समस्याओं का निराकरण किया जाता था। सरकार ने अनुभव किया कि प्रदेश के दूरदराज से आने वाले लोगों का काफ ी समय व धन व्यय होता है। इसको ध्यान में रखते हुए उन्होंने कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में यह कार्यक्रम का आयोजित किया। जनसमस्याओं के निराकरण के लिए जनपद स्तर पर प्रभारी मंत्रियों द्वारा भी जनता दरबार आयोजित किये जायेंगे, इसके साथ ही आयोजित होने वाले तहसील दिवसों मे भी प्रभारी मंत्री जनसमस्याएं सुनकर उनका निराकरण करेंगें। उन्होंने कहा कि लोग अपनी समस्यायें पता व फ ोन नंबर के साथ मुख्यमंत्री समाधान पोर्टल पर भी दर्ज करा सकते है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि संगठन के निवेदन पर मुख्यमंत्री ने खुद और मंत्रियों के कार्यक्रम तय किए हैं। इस दौरान मेयर डॉद्य. जोगेंद्र रौतेला, विधायक नवीन दुम्का, बंशीधर भगत, संजीव आर्या, दीवान सिंह बिष्ट, पुष्कर धामी, राम सिंह कैडा, पूर्व सांसद बलराज पासी, जिलाध्यक्ष प्रदीप विष्ट, मनोज साह, अनिल डब्बू, बिंदेश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
-आर्थिक मदद न मिली तो कर लूंगा आत्मदाह
पहले पत्नी फिर मां की कैंसर से मौत होने के बाद सरकार से आर्थिक मदद न मिलने से क्षुब्ध रूपपुर देवलचौड़ के बुजुर्ग गंगा सिंह मुख्यमंत्री को अपनी फरियाद सुनाते रो पड़े। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक मदद न मिली तो वह 15 सितंबर को तहसील में आत्मदाह कर लेंगे। 62 साल के गंगा सिंह (62) ने कहा कि घर में कैंसर रोग से दो-दो सदस्यों के पीड़ित होने पर इलाज के लिए कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई मगर किसी ने नहीं सुनी। दोनों के इलाज में जमा पूंजी खत्म होने पर उसे छह बीघा जमीन भी गिरवी रखनी पड़ी। बैंक से भी लोन लिया मगर मां और पत्नी को न बचा सका। पत्नी कमला देवी की एक मार्च को मृत्यु हुई। 16 मई को मां चल बसी। वह सात लाख का कर्जदार हो चुके हैं। खेतीबाड़ी कर किसी तरह घर का खर्चा चला रहे हैं। भागदौड़ करते करते थक चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता होने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मुख्यमंत्री ने पूरी मदद करने का भरोसा दिया।