हल्द्वानी। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत लांच हुए लगभग एक माह का समय हो चुका है लेकिन प्रदेश के पांच जिले में महज 43 लोगों का ही इलाज हो पाया है। इन अस्पतालों को 5.99 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
आयुष्मान भारत जोरशोर से चल रहा है। प्रचार-प्रसार के अभाव में योजना की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। यह योजना 23 सितंबर को लांच हुई थी। तब से 25 दिन के भीतर महज 43 मरीज ही इलाज के लिए आए। पांच जिलों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों का तीन सरकारी अस्पतालों समेत निजी अस्पतालों में इलाज हुआ। देहरादून में 26, ऊधमसिंह नगर में 13, पौड़ी में दो, उत्तरकाशी में एक, हरिद्वार में एक मरीज का इलाज हुआ। अगर नैनीताल जिले की बात करें तो तीन निजी अस्पताल, ऊधमसिंह नगर में दो सरकारी अस्पताल पंजीकृत हो सके हैं। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत को लेकर लोग कितने सजग हैं।
अस्पतालों को हुआ 5.99 लाख रुपये का भुगतान
तीन सरकारी अस्पतालों को छोड़कर बाकी ने निजी अस्पतालों में इलाज लिया
नेशनल पोर्टबिलिटी सॉफ्टवेयर बन रहा बाधक
हल्द्वानी। नेशनल पोर्टबिलिटी सॉफ्टवेयर (एनपीएस) आयुष्मान योजना के तहत इलाज में बाधक बन रहा है। सॉफ्टवेयर के न चलने से लोगों को परेशानी हो रही है।
आयुष्मान भारत की नोडल अधिकारी डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि मरीज अगर इस राज्य का है तो निजी या सरकारी अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है। अस्पताल से उसे किसी दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया जा सकता है। एनपीएस के तहत मरीज को रेफर करने की प्रक्रिया है लेकिन सॉफ्टवेयर खराब होने के कारण मौखिक रूप से बात कर दूसरे अस्पताल में भेजा जा सकता है। रक्षित अग्रवाल के पिता चक्षु अग्रवाल ने बताया कि उनका बेटा किसी भी अस्पताल में भर्ती नहीं था और सीधे राममूर्ति अस्पताल लेकर गए थे। सीएमओ डॉ. भारती राणा ने बताया कि अभी कोई दूसरा कार्ड जारी नहीं किया गया है। पूरे प्रकरण की जानकारी डॉ. नैथानी को दी गई है जबकि परिवार के करीबी धीरु पाठक का कहना है कि दूसरा कार्ड जारी हो गया है।
राज्य के किसी निजी या सरकारी अस्पताल से रिफर होना जरूरी
सॉफ्टवेयर के जरिए दूसरे राज्य में भेजा जाता है मरीज