रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत ब्लॉक के थापला स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीसीआरएएस) में आयोजित सेमीनार में वैज्ञानिकों ने औषधीय पादपों के संवर्धन और संरक्षण पर मंथन किया। कहा कि औषधीय पादपों का स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष महत्व है। स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर छात्र-छात्राओं को भी इसका ज्ञान दिया जा सकता है। इसे आजीविका से जोड़कर ग्रामीणों की आर्थिकी मजबूत की जा सकती है।
औषधीय पादपों का राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण और आजीविका विषय पर सेमीनार का आयोजन किया गया। संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. ओम प्रकाश की अध्यक्षता में आयोजित संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने कहा कि पूरे विश्व का रुझान आज आयुर्वेद की तरफ है। आयुर्वेद भारत की प्राचीन विधा है, इसके संवर्धन और संरक्षण के लिए व्यापक तैयारियां करनी होंगी। कहा कि सीसीआरएएस औषधीय पादपों के संरक्षण में शानदार भूमिका निभा रहा है।
इस दौरान तमाम क्षेत्रों से आए वैज्ञानिकों ने पादपों के संवर्धन को लेकर मंथन किया। कहा कि औषधीय पादपों का पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी भूमिका रही है। कहा कि ग्रामीणों को इससे जोड़कर उनकी आर्थिकी को मजबूत किया जा सकता है। स्थानीय काश्तकार जड़ी बूटी के क्षेत्र में अच्छी तरक्की कर सकते हैं। जड़ी-बूटी की खेती को वन्य जीवों से भी खतरा नहीं है।