नैनीताल। एनएच 74 भूमि मुआवजा आवंटन घोटाले के दो आरोपियों की जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायाधीश / विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कुमकुम रानी की अदालत ने शुक्रवार को खारिज कर दी। मालूम हो कि स्टांप विक्रता जिशान और जसपुर एसडीएम दफ्तर का चौकीदार राम समुज ने जमानत याचिका दायर की थी।
एनएन घोटाले के आरोपी काशीपुर तहसील के स्टांप विक्रेता जिशान पुत्र जलील अहमद ने काश्तकारों और अधिकारियों के साथ मिलकर एनएच से बाहर की भूमि खसरा नंबर 126, 27 व 28 जो कृषि भूमि थ्री डी में थी, उसे अकृषि भूमि दर्शाकर काश्तकारों को 23 करोड़ का मुआवजा दिलाया। जिशान ने अपनी जमानत अर्जी में स्वयं को निर्दोष बताया था, जबकि जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि काश्तकारों की कृषि भूमि को व्यवसायिक दर्शाने के एवज में स्टांप विक्रेता जिशान के एक्सिस बैंक के खाते में 21 जून 2016 को 2.76 करोड़ और एक जुलाई 2016 को 1.35 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में जमा हुए। जिशान ने इस राशि में डेढ़ करोड़ रुपये आरटीजीएस के जरिए तत्कालीन भूमि अध्यापित अधिकारी डीपी सिंह की परिचित प्रिया शर्मा के खाते में जमा कराए।
डीजीसी सुशील कुमार शर्मा के इन तर्कों के आधार पर याची जिशान की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। दूसरे आरोपी उप जिलाधिकारी जसपुर के चौकीदार राम समुज पुत्र दूध नाथ की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी गई। इस चौकीदार ने काश्तकारों की भूमि को बैक डेट में तहसील के रजिस्ट्रर में व्यवसायिक भूमि के रूप में दर्ज कर दिया, जबकि यह काम पेशकार का होता है। तत्कालीन पेशकार ने बैक डेट में ऐसी इंट्री करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पेशकार और आरोपी चौकीदार के हस्तलेख को मिलान हेतु विधि विज्ञान प्रयोगशाला देहरादून भेजा गया जिसमें यह हस्तलेख चौकीदार राम समुज के पाए गए। इसी आधार पर उसकी भी जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।