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क्यों शामिल कर दिया बिठौरिया नंबर दो

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हल्द्वानी। नगर निगम में शामिल होने के अपने मानक हैं। हल्द्वानी के 36 गांव को नगर निगम में शामिल करने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। अधिकारियों ने भाजपा नेताओं के दबाव में गांव को नगर निगम में शामिल किया। हम सिर्फ वोट देने के लिए रह गए हैं। नगर निगम क्षेत्र में 50 साला से मूलभूत सुविधा नहीं मिल पाई, हमें कैसे मिलेगी।
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बिठौरिया नंबर दो की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार 59 प्रतिशत खेती है। इस गांव का क्षेत्रफल 61.36 हेक्टेयर है। आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार 761 है। नियमों की बात करें तो नगर निगम में शामिल होने के लिए पांच नियमों का पालन किया जाना चाहिए। इसमें से चार नियमों का पालन ये गांव नहीं कर रहा है। गांव में खेती हो रही है। लोगों का व्यवसाय कृषि, नौकरी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहाड़ी से सटे इस गांव में नगर निगम को मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में सालों लग जाएंगे। कहा कि नगर निगम 50 सालों में अपने क्षेत्र में सुविधाएं नहीं दे पाया है। हमें कहां से स्ट्रीट लाइट, सीवर, सड़क, पेयजल की सुविधा मिल पाएगी। आरोप लगाया कि भाजपा ने उनके गांव को मेयर के चुनाव जीतने के लिए शामिल कराया है। गांव वाले सिर्फ वोट देने के लिए हैं।

कोई आधार तो बताएं अधिकारी, निगम में शामिल करने के मानक भी रखे गए ताख पर
भाजपा नेताओं ने मेयर चुनाव को देखते हुए नगर निगम में गांव को शामिल कराया

क्या बोले बिठौरिया नंबर दो के ग्रामीण -

हमारे गांव को निगम में शामिल करने से कोई फायदा नहीं होगा। गांव में जो विकास कार्य होने थे, वह भी लंबित हो जाएंगे। टैक्स देकर सरकारी खजाना भरेंगे। जनता को कोई फायदा मिलने से रहा। चुनाव के लिए यह सब हो रहा है।
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- हेमा जोशी

कृषि करने वाले लोगों को नुकसान होगा। निगम कितना टैक्स वसूलेगा। इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। इतने टैक्स आम आदमी कैसे देगा। टैक्स के बदले सुविधा मिले तो कोई बात भी बने।
-दीपक खुल्बे

निगम के गांव में आने से विकास कार्य बाधित होंगे। हमें छोटे-छोटे काम के लिए निगम दफ्तर के सैकड़ों चक्कर लगाने पडे़ंगे, निगम को चाहिए की गांव में छोटे सेंटर खोले जाएं। जो लोगों की समस्याओं का त्वरित निवारण करें।
- जगदीश खुल्बे

गांव में सड़क सुधार का काम बरसों से लटका है। उन्हें उम्मीद है कि निगम बनने से लाभ मिलेगा। संकोच इस बात का है कि जैसा हल्द्वानी का हाल है, वैसा हाल उनके गांव का न हो जाए।
- उमेश जोशी

अभियान
नगर निगम की सीमा में 36 गांवों को शामिल किया गया है। किन मानकों के आधार पर इन्हें शामिल किया गया, यहां के नागरिक कैसे महसूस कर रहे हैं, नगर निगम की जमीनी हकीकत क्या है। अमर उजाला की टीम रोज गांव दर गांव इन सवालों के जवाब खोजने के साथ ही चुनौतियों और समस्याओं का भी जायजा लेगी।
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सोमवार को टीम मानपुर पश्चिम गांव में रहेगी।
मंगलवार को टीम मानपुर पूर्व गांव में रहेगी।
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