नजंग (पिथौरागढ़)। मालपा और मांगती में 14 अगस्त को आपदा में हताहत होने वालों का आंकड़ा काफी अधिक हो सकता है। कारण यह भी है कि काम की तलाश मेें नेपाल से भारत पहुंचे कई मजदूरों की कोई गिनती ही नहीं हो पाई है। अपनों की तलाश में मालपा के टूटे-फूटे रास्ते को पार कर किसी तरह नजंग पहुंचे दामोदर और दिनेश के मुताबिक आपदा की रात मालपा में ही करीब 30 नेपाली मजदूर रहे होंगे।
दामोदर और दिनेश ही थे जो मालपा से लौटते समय नजंग के पास मुख्य विकास अधिकारी आशीष चौहान को मिले थे। आशीष चौहान मंगलवार को एनडीआरएफ सहित करीब 35 लोगों के दल के साथ नजंग से होते हुए मालपा पहुंचने की कोशिश में थे। आशीष चौहान ने इन दोनों युवाओं को साथ लिया और आगे बढ़े थे। मालपा से करीब एक किलोमीटर पहले ही रास्ता बहने के कारण आशीष को वापस लौटना पड़ा था। इन दोनों युवाओं ने एक तार के सहारे इस जगह को पार किया था।
नजंग में मुलाकात होने पर दोनों युवाओं ने बताया कि मालपा में करीब 30 और नजंग में करीब दस नेपाली मजदूरों के 14 अगस्त को रहने का अनुमान है। ये मजदूर जाजरकोट नेपाल के हैं। इनमें से किसी के भी बचने की सूचना नहीं है। खुद आशीष ने माना कि मालपा में हताहत होने वालों की संख्या अनुमान से अधिक हो सकती है। बुधवार तक यही साफ हो पाया था कि मालपा में छह मृतक और लापता 17 लोग है। इनमें से 12 नेपाली मजदूर हैं। मांगती में सेना के छह जवान और दो अन्य सहित आठ लापता है। इनमें से एक महिला का शव मिला। यहां पर भी करीब दस नेपाली मजदूरों के आपदा की रात होने की बात की जा रही है।
सड़क निर्माण और कैलाश मानसरोवर यात्रा के चलते बड़ी संख्या में नेपाली मजदूर धारचूला से लेकर मालपा तक डेरा डाले रहते हैं। दिनेश और दामोदर के मुताबिक मालपा में केवल मलबा ही मलबा है। किसी के बचने की शायद ही कोई संभावना बने।
ये आठ गांव कटे हैं
-लामारी
-बूंदी
-गर्ब्यांग
-गुंजी
-नपलच्यू
-नाभी
-रांगकोंग
-कुटी