फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईको सेंसिटिव जोन के विरोध में निदेशक का घेराव

विज्ञापन
कॉर्बेट नेशनल पार्क बारिश के दिनों में बंद कर दिया जाता है। - फोटो : अमरउजाला
विज्ञापन
रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) की बाहरी सीमा के एक किमी के दायरे में प्रस्तावित इको सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) के विरोध में बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने सीटीआर निदेशक राहुल का घेराव किया। उन्होंने ईएसजेड की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी।
विज्ञापन

ईएसजेड विरोधी संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि वन्यजीवों के आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। वनग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिल सका है। वन्यजीव किसानों की फसलों को बर्बाद कर जान, माल के लिए खतरा बन गए हैं। इन्हें बचाने के लिए सरकार ने इस इलाके में भू उपयोग परिवर्तन और भूमि की खरीद-फरोख्त पर भी रोक लगा दी है। अब ईएसजेड के मानकों का पालन होने से ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने 15 दिन में मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। सीटीआर निदेशक राहुल ने ग्रामीणों को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 12 साल पुराने आदेश के अनुपालन में यह जोन बनाया जा रहा है, लेकिन यदि सरकार चाहे तो वही इसको शिथिल कर सकती है। इसके लिए ग्रामीणों को अपने सुझाव सरकार तक पहुंचाने चाहिए। सबकी सहमति से ही इसका प्रारूप बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इस दौरान मुनीष कुमार, नरेंद्र शर्मा, महेश जोशी, त्रिलोक सिंह, प्रकाश चंद्र बेलवाल, ललिता रावत, प्रेम पपनै, गणेश सिंह नेगी, तारा दत्त बेलवाल आदि रहे।
विज्ञापन



कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक का घेराव
इको सेंसिटिव जोन के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें