हल्द्वानी। संक्रामक रोगों की जांच कैसे की जाए और सैंपल में जांच के दौरान क्या-क्या देखना जरूरी है इसकी बारीकी 19 टेक्नीशियनों को बताई गई। मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थिएटर में माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा संचालित वायरोलॉजी लैब की ओर से दो दिनी प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने किया। इसमें संक्रामक रोगों के लक्षण कैसे होते हैं और इनकी जांच का प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने राज्य के विभिन्न चिकित्सालयों जैसे श्रीनगर गढ़वाल, बेस चिकित्सालय हल्द्वानी और राजकीय मेडिकल कॉलेज के कुल 19 टेक्नीशियनों को जानकारी दी। बताया गया कि डेंगू, हैपेटाइटिस ए एवं बी, मिजल्स, रोटा वायरस और एंट्रोवायरस आदि के खून के नमूने राज्य से बाहर भेजे जाते थे। अब ऐसे रोगों की जांच राज्य में ही हो सकेगी। टेक्नीशियनों को एलाइजा और सीरोलॉजी की जांच के बारे में गया। वायरोलॉजी लैब की प्रमुख एसोसिएट डॉ. विनीता रावत ने कहा कि वायरोलॉजी लैब में सभी तरह के संक्रमित रोगों की जांच की जा सकती है। वहां पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश, डॉ. विक्रांत नेगी, डॉ. अंकुर सक्सेना, डॉ. मयंक, डॉ. ललित सिंह, नीरज आर्या, मोहन पाल सिंह आदि थे।
एलाइजा और सीरोलाजी जांच के बारे में जानकारी दी
प्रशिक्षण कार्यशाला में पहुंचे 19 टेक्नीशियन