हल्द्वानी। गौलापार में प्रस्तावित मोटर ट्रेनिंग स्कूल की योजना का भगवान ही मालिक है। योजना की प्रगति और तेजी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वन भूमि जुटाने के लिए एक-दो नहीं बल्कि सात साल लग गए।
सड़क दुर्घटनाओं एक बड़ा कारण चालक की लापरवाही होता है। साथ ही वाहनों की फिटनेस फेल होेने पर भी हादसे होते हैं। ऐसे में परिवहन विभाग ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सहयोग से गौलापार में 2008 में मोटर ट्रेनिंग स्कूल की योजना बनाई। इस योजना के लिए केंद्र सरकार पूरी धनराशि देने को तैयार थी। परिवहन विभाग ने योजना के लिए गौलापार में वन विभाग की आठ हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार किया, इस प्रस्ताव के बाद वन भूमि हस्तांतरण जुड़ी क्षतिपूरक वनीकरण, दो गुनी भूमि वन विभाग, भूमि की नेट प्रेजेंट वैल्यू देने समेत अन्य शर्त और नियमों को पूरा करने और अंतिम सहमति मिलने में ही सात साल लग गए। 2015 में परिवहन विभाग को गौलापार में स्लॉटर हाउस वाली भूमि मिल सकी। इसके बाद से भी स्थिति जस की तस है।
आ गए कामकाज के दिन
2008 में बनाई गई थी योजना
2015 में गौलापार में स्लॉटर हाउस वाली जमीन मिल सकी
जमीन जुटाने में सात साल खपा दिए, काम कब शुरू होगा पता नहीं
मोटर ट्रेनिंग स्कूल योजना
चुनाव निपटने के बाद जनता सरकारों की ओर उम्मीद भरी निगाह से देखती है। होना भी चाहिए। सवाल उसके वोट का है और विकास होते देखने का भी। अपने शहर की कई ऐसी योजनाएं हैं जिसे किसी ने किसी कारण से अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। यदि इन पर जमीनी रूप से काम होता या जनप्रतिनिधि ईमानदार कोशिश करते तो लोगों को सुविधा होती। हम उन योजनाओं को फिर से जनप्रतिनिधियों और अफसरों के सामने रख रहे हैं जो धरातल पर उतरने के लिए तरस रही हैं। क्या पता पब्लिक की पीड़ा को समझते हुए उन्हें तरस आ जाए। क्या पता चुनावी खुमारी के बाद अब वे एक्शन के मूड में दिखें.....
प्रशिक्षण के साथ वाहनों की जांच
हल्द्वानी। प्रस्तावित मोटर ट्रेनिंग स्कूल में चालकों को प्रशिक्षण, रिफ्रेशर कोर्स कराया जाएगा। इसके अलावा वाहनों की जांच मशीनों के माध्यम से कराने के लिए अलग इकाई बनाने की योजना है, जिससे वाहनों की जांच और सघनता से कराई जा सके।