हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में आयोजित कार्यशाला में संकाय सदस्यों को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के पाठ्यक्रम में 2019 में हुए बदलाव की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि मेडिकल पाठ्यक्रम में आए बदलाव की जानकारी संकाय सदस्यों और छात्र-छात्राओं को होनी चाहिए।
जीएमसी के थियेटर में हुई कार्यशाला का शुभारंभ जीएमसी के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा, अल्मोड़ा के प्राचार्य डॉ. आरजी नौटियाल, एमसीआई की ऑब्जर्वर डॉ. आरती कोटवाल ने किया। इसमें मुख्य वक्ता मेडिकल एजूकेशन यूनिट के इंचार्ज डॉ. सौरभ अग्रवाल ने कहा कि 1997 के बाद 2019 में एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया है। इसकी जानकारी छात्र-छात्राओं और संकाय सदस्यों को होनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि पांच वर्षीय एमबीबीएस के प्रत्येक वर्ष के पाठ्यक्रम में संशोधन किया गया है। इसकी जानकारी होनी इसलिए जरूरी है कि जब छात्र एमबीबीएस करने के बाद चिकित्सक बनेगा तो वह कुशल चिकित्सक के साथ ही व्यावहारिक चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे सके। नए पाठ्यक्रम के तहत एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों को टांके लगाना, ब्लड प्रेशर नापना, मरीजों में ग्लूकोस नापना, जीवनरक्षक तकनीक, यूरीन विश्लेषण भी आना चाहिए। छात्रों को प्रथम वर्ष की पढ़ाई में भाषा के कारण आ रही दिक्कतों का समाधान करना होगा। उन्हें कंप्यूटर ज्ञान, चिकित्सा का नैतिक ज्ञान, आमजन से व्यवहार, बोलने में विनम्रता भी सीखना होगी। यह सब पांच वर्षों में बताया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों को थ्योरी, चिकित्सा, मनोदृष्टि का ज्ञान, बातचीत का कौशल इन सभी श्रेणियों में पास होना जरूरी है। जो इसमें उत्तीर्ण होता है वह योग्य चिकित्सक बनने लायक होता है। कार्यशाला में जीएमसी के सभी सदस्यों के अलावा वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जीएमसी श्रीनगर, दून कॉलेज के संकाय सदस्यों ने भी भाग लिया। कार्यशाला में डॉ. विनीता रावत, डॉ. एसआर सक्सेना, डॉ. गजाला रिजवी, डॉ. विमलेश शर्मा ने पाठ्यक्रम बढ़ाने, नई तकनीक की जानकारी दी। प्राचार्य डॉ. भैसोड़ा ने कहा कि यह बदलाव शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाएगा। कार्यशाला में एमएस डॉ. अरुण जोशी, डॉ. डॉ. एके सिंह, डॉ. एसआर सक्सेना, डॉ. गीता जैन, डॉ. पंकज वर्मा, डॉ. गीता भंडारी, डॉ. जीएस तियिाल, डॉ. एके सिंह, डॉ. भावना श्रीवास्तव, डॉ. वीके द्विवेदी, डॉ. उमेश, डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. वी सत्यवली, डॉ. साधना अवस्थी, डॉ. अंकित कौशिक, डॉ. अनामिका जायसवाल, डॉ. ललित चौधरी, डॉ. यतेंद्र रावत आदि थे।
मृदुभाषी और व्यावहारिक बनें चिकित्सक
मेडिकल पाठ्यक्रम में बदलाव की जानकारी दी