नैनीताल। कुमाऊं विवि ने दीक्षांत समारोह में 158 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की है। वनस्पति विज्ञान के कुछ उपाधि धारकों से वार्ता में उन्होंने अपने शोध कार्य की जानकारियां साझा कीं। डॉ. वंदना तिवारी ने बताया कि उन्होंने होम गार्डन में काम किया और 150 गांवों का सर्वे किया। शोध में पाया कि जिन घरों में होम गार्डन बनाए गए हैं वहां के लोग अधिक स्वस्थ हैं। डॉ. रजनी रावत ने बताया कि उन्होंने तुलसी के छह प्रकारों पर काम किया। डॉ. उर्वशी वर्मा ने बताया कि हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले अनावृतबीजी पौधों पर काम किया। वहीं डॉ. कृष्णा चंद्रा ने लाइकेन पर काम किया और उत्तराखंड ऐतिहासिक धरोहरों में पड़ने वाले काले धब्बों के विषय में अध्ययन किया। डॉ. कपिल बिष्ट ने मिलम और आदि कैलाश पर काम किया।
शादी के बाद भी कायम रही पढ़ने की ललक
- डॉ.देवकी सिरौला ने शिक्षाशास्त्र विषय में पीएचडी की उपाधि ग्रहण की और अपना शोध कार्य एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में पूरा किया। उन्होंने बताया कि 1991 में उनकी शादी हो गई थी और उस समय वे बीए प्रथम वर्ष में थीं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई की रुचि थी। इस कारण पढ़ाई जारी रखी और वे हिंदी, समाजशास्त्र, शिक्षाशास्त्र से स्नातक के साथ बीएड भी कर चुकी हैं। उनके पति एनबी सिंह नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।
- बागेश्वर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. प्रकाश फुलारा ने रिलेटिविस्टिक मॉडल्स फॉर इक्विलिब्रिअम एंड डाइनामिकल स्टैलर स्ट्रक्चर विषय पर शोध कार्य पूरा कर पीएचडी की उपाधि ग्रहण की। उनके शोध पत्रों का प्रकाशन कई अंतरराष्ट्रीय जनर्लस में हो चुका है। वे रसायन, भौतिक विज्ञान और गणित से एमएससी, नेट, आईआईटी गेट कर चुके हैं।
- दिव्यांग दीपक मेहता ने हिंदी में शोध कार्य किया। उनका विषय उत्तराखंड के लोक गीतों का साहित्य एवं सांस्कृतिक आयाम रहा। वे राजकीय प्राथमिक स्कूल चौखुटिया में तैनात हैं और रंगमंच के साथ भी जुड़े हैं।