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पुरोधाओं के संवाद से और निखरता है साहित्य

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कुमाऊं साहित्य महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
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नैनीताल। तीसरे कुमाऊं लिटरेरी फेस्टिवल का रविवार को समापन हो गया। इस मौके पर अनुराधा रॉय की किताब ऑल लाइव्स वी नेवर लिव्ड, पवन कुमार वर्मा की किताब आदि शंकराचार्य, हिमालय के मानचित्र और कुमाऊं की लोक कथाओं पर विद्वानों के बीच गहन संवाद हुआ। घंटों चले इस संवाद में साहित्यकारों ने कहा कि पुरोधाओं के बीच संवाद से साहित्य में और ज्यादा निखार आता है। ऐसे संवाद समय-समय पर होते रहने चाहिए ताकि साहित्य में निखार आने का सिलसिला जारी रहे।
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हिमालयन इकोज की ओर से आयोजित कुमाऊं लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का रविवार को आखिरी दिन था। सुबह से ही प्रसाद भवन में साहित्य प्रेमी जुटने शुरू हो गए थे। शुरुआत में ऑल सेंट्स कॉलेज की प्रधानाचार्या किरन जर्माया ने लेखिका अनुराधा रॉय से उनकी किताब ऑल लाइव्स वी नेवर लीव्ड पर विस्तार से चर्चा की।
इसके बाद पवन कुमार वर्मा की किताब आदि शंकराचार्य पर पुष्पेश पंत ने संवाद किया। दीपा अग्रवाल ने नीता गुप्ता से कुमाऊं की लोक कथाओं पर संवाद किया। हरीश कपाड़िया ने स्टीफन ऑल्टर से हिमालय के मानचित्रों को लेकर संवाद किया। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, जाह्ववी प्रसाद, नेहा प्रसाद, अरुण साह, मधु विग, बीके विग, भुवन चंद्र त्रिपाठी आदि थे।
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इस तरह के आयोजनों से मिलता है साहित्य को बढ़ावा
नैनीताल। साहित्यकार कविता खोसा ने कहा कि यह एक अच्छी पहल है। इस तरह के आयोजनों से साहित्य को बढ़ावा मिलता है। वह साहित्य के साथ साथ महिला सशक्तीकरण पर भी काम कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि तमाम महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने साहित्य की पढ़ाई की है, लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह एनजीओ के साथ मिलकर इस तरह की महिलाओं को आगे बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास कर रहीं हैं।
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