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सुंदरखाल गांव हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

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रामनगर (नैनीताल)। वन भूमि पर बसे सुंदरखाल गांव को हाईकोर्ट के आदेश पर खाली कराया जाना है। इसके खिलाफ मनोनीत प्रधान चंदन राम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई है। इसमें वाद नंबर मिल गया है। लंबे अवकाश के कारण कोर्ट में 22 अक्तूबर को सुनवाई होगी।
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विधायक दीवान सिंह बिष्ट के बेटे भाजपा नेता जगमोहन बिष्ट के साथ दिल्ली पहुंचे मनोनीत प्रधान की ओर से अधिवक्ता वीके शुक्ला ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट में पीटीशन दायर की। इसको सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकृत कर लिया। भाजपा नेता जगमोहन ने बताया कि वह ग्रामीणों के साथ हैं। कानूनी लड़ाई कानून के जरिए ही लड़ी जाएगी। इससे पहले इसी प्रकार के आदेश पर वनगूजरों के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट से स्थगनादेश जारी हो चुका है।

सुंदरखाल मामले पर सुप्रीम कोर्ट में पीटीशन दायर
विधायक के बेटे की पहल पर वाद नंबर मिला

24 वनग्रामों के लिए भी लड़ाई लड़ी जाएगी
रामनगर (नैनीताल)। वन ग्राम विकास संघर्ष समिति ने विधानसभा क्षेत्र के 24 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम बनाने की मांग की है। समिति के अध्यक्ष एस लाल ने बताया कि रामनगर विकास खंड में स्थित 24 वन ग्रामों के बाशिंदों को सदियों बाद भी काबिज भूमि पर कानूनी अधिकार नहीं मिल सका है। इस कारण वह मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। वन अधिकार कानून का लाभ भी इन ग्रामीणों को नहीं मिल सका है जबकि इनमें से कई गांवों को वन विभाग ने ही 1932 से पहले टोंगिया वनीकरण के लिए बसाया था। यहां सुंदरखाल के अलावा भी देवीचौड़ खत्ता, रिंगौड़ा खत्ता, आमडंडा खत्ता, टेड़ा खत्ता, चोपड़ा, लेटी, रामपुर, बेलगढ़ गठिया, किशनपुर छोई, अर्जुन नाला, कारगिल पटरानी, पटरानी, कुंभगडार, शिवनाथपुर नई बस्ती, शिवनाथपुर पुरानी बस्ती, नत्थावली, तुमड़िया डामपार, कुंभगडार खत्ता, मालधन नंबर 8 व 10, हनुमानगढ़ी, कालूसिद्ध, नई बस्ती, बेलघट्टी, पूछड़ी नई बस्ती आदि वनग्राम हैं।
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