नैनीताल में बुधवार को मौसम कुछ इस तरह बना रहा।
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नैनीताल। नगर के वन अंधाधुंध भवन निर्माण की भेंट चढ़ रहे हैं। आए दिन वनों को रौंद कर भवन बनाए जा रहे हैं। बीते 20 साल में सिर्फ नैनी झील के कैचमेंट क्षेत्र में 6.45 प्रतिशत वन काट डाले गए, जबकि भवनों की संख्या 5.93 प्रतिशत बढ़ गई। सिंचाई विभाग ने एनआईएच रुड़की से नैनी झील के गिरते जलस्तर पर शोध कराया तो इसका खुलासा हुआ। शोध से चौंकाने वाला एक और तथ्य सामने आया है कि झील की गहराई भी घट रही है। 30 साल में झील की गहराई .15 प्रतिशत घटी है। हालांकि झील का जलस्तर बनाए रखने और झील को संजीवनी देने संबंधी रिपोर्ट आनी बाकी है।
नैनी झील का जलस्तर हर साल गिर रहा है। गिरते जल स्तर को बचाने के लिए नागरिकों के पेयजल में कटौती कर दी गई है। इसके बाद भी जलस्तर को इस साल शून्य होने से नहीं बचाया जा सका। सबकी यह चिंता है कि झील को कैसे बचाया जाए। इसीलिए झील के संरक्षण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दी गई। इसके बाद विभाग ने एनआईएच रुड़की, आईआईएसडब्ल्यूसी रुड़की के वैज्ञानिकों से झील पर शोध कराया। कई महीने चले शोध के नतीजे शुक्रवार को सामने आए। शोधकर्ताओं की टीम ने नैनी झील के कैचमेंट को लेकर विस्तृत रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में सभी आंकड़े प्रतिशत में हैं। बताया कि 20 साल पहले 1998 में झील के कैचमेंट क्षेत्र की वन भूमि लगातार घटी है। 20 साल में 6.45 प्रतिशत वन भूमि कम हुई है। दूसरी ओर नगर में भवनों का निर्माण तेजी से हुआ है। 20 साल में भवनों की संख्या 5.93 प्रतिशत बढ़ी है। अभी भी वनों का कुचल कर भवन बनाने का सिलसिला जारी है। झील की गहराई भी घट रही है।
सिंचाई विभाग ने एनआईएच रुड़की से नैनी झील पर शोध कराया तो हुआ खुलासा
20 साल में 6.45 प्रतिशत घटे वन, जबकि भवनों की संख्या 5.93 प्रतिशत बढ़ी
-आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट आना बाकी
सिंचाई विभाग के एई मनमोहन जोशी ने बताया कि तीन संस्थाओं से शोध कराया गया था, जिनमें से दो की रिपोर्ट आ चुकी है, जबकि तीसरी संस्था आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट आना भी शेष है। आईआईटी रुड़की की जांच रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है।