नैनीताल। हाईकोर्ट ने आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर और मातृ सदन हरिद्वार के स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव को 12 घंटे के भीतर स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के साथ बैठक कर गंगा में प्रस्तावित चार जल विद्युत परियोजनाओं को रोके जाने के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा है।
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि वह गंगा में निर्माणाधीन चार जल विद्युत परियोजनाओं भागीरथी, पालामनेरी, लोहारी नागपाला और भैरोघाटी के विरोध में 22 जून से मातृ सदन में अनशन पर थे। लेकिन, 10 जुलाई को हरिद्वार पुलिस ने उन्हें अनशन स्थल से उठाकर अज्ञात स्थान पर बंद कर रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके समर्थकों के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया है। पुलिस का यह व्यवहार मानवाधिकारों के खिलाफ है। याचिका में कहा गया कि याची पवित्र गंगा को बचाने के लिए अनशन पर थे। इस भूख हड़ताल से कोई खतरा नहीं था, अगर पुलिस को वहां से हटाना था तो पहले उन्हें सूचित किया जाना चाहिए था।
इस पर न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने कहा कि स्वामी ज्ञानस्वरूप 86 वर्ष के हैं और आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर हैं। उनके आंदोलन से सरकार को कोई खतरा नहीं था। खंडपीठ ने प्रमुख सचिव (गृह) को निर्देश दिए हैं कि स्वामी ज्ञान स्वरूप को जिस स्थान पर रखा है, उसकी सूचना उनके समर्थकों को दें। कोर्ट ने जिला प्रशासन हरिद्वार को निर्देश दिए हैं कि उनका स्वास्थ्य परीक्षण एम्स ऋषिकेश में कराया जाए। यदि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद अस्वस्थ पाए जाएं तो उनको एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराएं और यदि वे स्वस्थ हैं तो उन्हें सुरक्षा के साथ मातृ सदन में पहुंचाएं।
हाईकोर्ट ने कहा-गंगा पर विद्युत परियोजनाओं को रोके जाने के मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करें
इन्हें भी दिए निर्देश
प्रमुख सचिव (गृह) से कहा-स्वामी सानंद को जिस स्थान पर रखा है, उसकी सूचना उनके समर्थकों को दें
हरिद्वार जिला प्रशासन से कहा-उनके स्वास्थ्य की जांच एम्स ऋषिकेश में कराएं और अस्वस्थ पाए जाने पर वहीं भर्ती कराएं
और यदि स्वामी सानंद स्वस्थ हैं तो उन्हें सुरक्षा के साथ मातृ सदन में पहुंचा जाए