नैनीताल। हाईकोर्ट ने उत्तरकाशी में आपदा मुआवजा की जांच करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद प्रदेश के परिवहन आयुक्त डी सेथिंल पांडियन को जांच सौंपी है। वह अपनी जांच रिपोर्ट तीन माह के भीतर कोर्ट को सौंपेंगे। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उत्तरकाशी निवासी जय प्रकाश ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2013 में बाढ़ के चलते उत्तरकाशी जनपद के कई गांवों को नुकसान हुआ था। ग्रामीणों की संपत्ति नष्ट हो गई थी। इस घटना के बाद शासन की ओर से ग्रामीणों को मुआवजा दिया गया। कुछ लोगों को एक से अधिक बार मुआवजा दिया गया जबकि कुछ लोगों को एक बार भी मुआवजा नहीं दिया गया। याची ने कोर्ट से मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की थी। खंडपीठ ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। खंडपीठ ने कहा कि परिवहन आयुक्त डी सेंथिल पांडियन जांच रिपोर्ट तीन माह में कोर्ट में पेश करें।
2013 में केदारनाथ में आई आपदा में कई राज्यों के लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था। यात्रियों के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों को भी इस कहर का सामना करना पड़ा था। इस आपदा में कई लोगों के मरने की बात सामने आई थी। सरकार ने राहत और बचाव को लेकर कोई कसर न छोड़ने का दावा किया था, लेकिन इसके बाद भी सरकार को कई सवालों का सामना करना पड़ा था। कैग ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाये थे और कहा था कि 2013 की आपदा के दौरान सरकार के पास मुआवजा वितरण की कोई पारदर्शी नीति नहीं थी। खुद एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को उस समय के मुख्य सचिव से जांच करानी पड़ी थी। अब एक बार फिर से यह मामला उठने पर सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।