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महिला सीट चाहने वालों के लिए काम नहीं आई शासन की परिक्रमा

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नैनीताल। नैनीताल पालिका अध्यक्ष के लिए इस बार महिला सीट होने की चर्चाएं तैर रही थीं। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने तो देहरादून के कई चक्कर भी लगा लिए थे। अंदरखाने तैयारी भी शुरू हो चुकी थीं। लेकिन यह सीट अनारक्षित ही रही। पालिका बनने के बाद से भाजपा को पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने का सुख नहीं मिल सका है। कांग्रेस को भी केवल एक ही बार पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने का मौका मिला है। बीते दिनों भाजपा और कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी चयन के लिए भेजे गए पर्यवेक्षकों के सामने महिला दावेदारों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। सत्ताधारी भाजपा के कई नेता सीट को महिला कराने के लिए शासन के चक्कर काट चुके थे लेकिन सरकार की ओर से जारी हुई सूची ने दलों की स्थानीय स्तर में तैयारियों को झटका दिया है।
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सामान्य जाति के दावेदारों के सपने टूटे
रामनगर (नैनीताल)। शहर की सड़कों में इन दिनों होर्डिंग और पोस्टर बता रहे थे कि पालिका अध्यक्ष पद के लिए नेताओं में कितनी छटपटाहट है लेकिन अन्य पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर कई के सपने टूट गए। 1989 में मो. अकरम नगरपालिका के अध्यक्ष बने थे। 1997 में भगीरथ लाल चौधरी ने अकरम को हराया था। 2003 के चुनाव में ओबीसी महिला सीट होने पर दोनों की पत्नियां मैदान में उतरी थीं बाजी भगीरथ लाल चौधरी की पत्नी उर्मिला चौधरी ने मारी। 2008 में दो चुनाव हारने के बाद मो. अकरम ने नगरपालिका की सीट में कब्जा जमाया। दोनों नेता इस समय कांग्रेस में हैं और दावेदार भी। भाजपा की ममता गोस्वामी, भाजपा के नगर अध्यक्ष सत्यप्रकाश शर्मा की पत्नी रुचि गिरी ने भी दावेदारी ठोकी है। निर्दलीय दावेदार भी कमर कसे हैं।

सीट सामान्य होने से दावेदार खुश
भवाली (नैनीताल)। नगर पालिका चुनावों में भवाली पालिका की सीट सामान्य खाते में गई है। हालांकि लोगों को इस बात की भी संभावना थी कि सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होगी। सीट सामान्य होने से जहां भाजपा, कांग्रेस के दावेदार खुश हैं वहीं आरक्षित होने की संभावना को देखते हुए तैयारी कर रहे दावेदारों के हाथ मायूसी लगी है। भवाली सीट इससे पहले महिला आरक्षित थी। भाजपा से नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष संजय वर्मा, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मोहन बिष्ट, लवेंद्र सिंह क्वीरा के नाम सामने आ रहे हैं। कांग्रेस से प्रदेश सचिव खष्टी बिष्ट, पूर्व पालिकाध्यक्ष भुवन अधिकारी, जीपी पंत स्कूल के प्रबंधक पुष्पेश पांडे और श्यामखेत के ग्राम प्रधान संजय जोशी के नामों की चर्चा हो रही है। निर्दलीय में भी कई नाम आगे आए हैं। भाजपा से प्रकाश आर्या और कांग्रेस दयाल चंद्र आर्या पालिका चुनाव की तैयारी में लगे थे। अब सीट सामान्य होने से उनके समीकरण बदल गए हैं।
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यहां लंबी है दावेदारों की लिस्ट
भीमताल (नैनीताल)। नगर पंचायत भीमताल की सीट लगातार तीसरी बार अनारक्षित हो गई। अनारक्षित होने से नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए दावेदारों की सूची भी लंबी हो गई है। भाजपा से दिनेश सांगुड़ी, राहुल जोशी, देवकी पांडे, भावना मेहरा, कमला आर्या, गीता पांडे, सुनील जोशी और कांग्रेस से डीके डालकोटी, सौरभ रौतेला, दीपू चनौतिया, दीपक वर्मा, विपिन सनवाल, रामपाल सिंह गंगोला, भावना नौलिया, आशा आर्या आदि दावेदार हैं। देवेंद्र फर्त्याल, बीडी पलड़िया निर्दलीय तो बसपा से नवीन आर्या की भी दावेदारी सामने आ रही है।

कालाढूंगी। नगर पंचायत अध्यक्ष सीट अन्य पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित होने पर सामान्य सीट पर चुनाव लड़ने के प्रत्याशियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। कालाढूंगी नगर पंचायत अध्यक्ष की यह सीट 25 वर्षों से सामान्य चली आ रही थी। इस बार इस सीट के आरक्षित होने की संभावना व्यक्त की जा रही थी। नगर पंचायत के उपाध्यक्ष रहे अली हुसैन लगातार दो बार से सामान्य सीट पर अध्यक्ष का चुनाव लड़ते आ रहे थे। इस बार वह सीट आरक्षित कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए थे। कांग्रेस नेता दीप चंद्र सती दो बार के अध्यक्ष रहे जबकि वर्तमान में भाजपा से पुष्कर कत्यूरा अध्यक्ष हैं। पूर्व सभासद राजेंद्र सिंह नेगी भी इस बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। कालाढूंगी नगर पंचायत में 24 नवंबर 1988 में हुए प्रथम चुनाव में जहूर अहमद अध्यक्ष बने थे।

पूर्व मंत्री दुर्गापाल के दुर्ग में सेंध
लालकुंआ। आरक्षण से लालकुंआ नगर पंचायत में पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को झटका लगा है और भाजपा फायदे में दिख रही है। भाजपा को अनुसूचित जाति से दमदार प्रत्याशी होने का लाभ मिल रहा है। अब कांग्रेस को यहां से प्रत्याशी की खोज भी नए सिरे से करनी होगी।
लालकुंआ नगर पंचायत काफी अर्से बाद आरक्षित हुई है। ऐसे में इस सीट पर सियासत अभी तक सामान्य सीट के दावेदारों के बीच ही होती आई है। यहां से पूर्व में कांग्रेस में और बाद में निर्दलीय रहे हरीश चंद्र दुर्गापाल के इर्द गिर्द भी राजनीतिक खींचतान सिमटी रही है। दुर्गापाल अब फिर कांग्रेस में है और इस बार समीकरण कांग्रेस के लिए ही मजबूत माने जा रहे थे। वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष की भूमिका भी कांग्रेस का ही पक्ष मजबूत करती दिख रही थी।
माना जा रहा था कि यह नगर पंचायत महिला सीट के लिए आरक्षित होगी। ऐसे में फिलहाल दोनों ही प्रमुख दल दमदार महिला प्रत्याशी की खोज मेें थे। अब सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई है और इससे कांग्रेस ज्यादा नुकसान में दिख रही है।
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