गरुड़ (बागेश्वर)। थाना क्षेत्र बैजनाथ के कोटफुलवारी गांव में बृहस्पतिवार तड़के एक मकान की दीवार ढ़हने से दंपति गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मलबे में दबने से बकरी के एक शावक की भी मौत हो गई।
राजस्व पुलिस के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह करीब चार बजे कोटफुलवारी गांव निवासी रमेश राम के मकान के पहले मंजिल की दीवार एकाएक ढ़ह गई। हादसे में मकान के दूसरी मंजिल में सोए रमेश राम (55) और उसकी पत्नी कमला देवी (45) मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों की आवाज सुनकर रमेश राम की लड़की और आसपास के ग्रामीण घटना स्थल पहुंचे। उन्होंने घायलों को मलबे से बाहर निकाला। 108 की मदद से घायलों को एमएमएस सीएचसी बैजनाथ लाया गया।
गंभीर रुप से घायल कमला देवी ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर एसएस गुंज्याल ने बताया कि रमेश की हालत ठीक है। घटना की सूचना पर एसडीएम सुंदर सिंह, जिला पंचायत सदस्य शिव सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान बलवंत सिंह भंडारी, थानाध्यक्ष मदन लाल, तहसीलदार दयाल चंद्र, प्रभारी कानूनगो भुवन वर्मा, पशु चिकित्साधिकारी आरएस खाती घटना स्थल पर पहुंचे। एसडीएम ने प्रभावित परिवार को खाने की सामग्री दी। एसडीएम ने बताया कि रमेश राम को जनहानी का चार लाख, पशु हानी का पंद्रह सौ और मकान का मुआवजे का एक दो दिन के अंदर भुगतान कर दिया जाएगा। काननूगो ने बताया कि बैगर बारिश के मकान गिरने का कारण मकान की दीवारों का कमजोर होना हो सकता है।
जाको राखे साइयां मार सक्ये न कोय
मकान के मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल रमेश राम ने कहा ‘मेरी लड़की रवीना (19) मेरे ऊपर गिरे पत्थरों को नहीं हटाती तो शायद मेरी भी जान चली जाती।’ बताया कि बृहस्पतिवार हादसे के दौरान वह और उसकी पत्नी कमला गहरी नींद में थे। मकान ढ़हने पर मेरी पत्नी, मैंने मदद के लिए आवाज लगाई। तब उनकी बेटी रवीना वहां पहुंची। उसने पिता के ऊपर गिरे पत्थरों को हटाया। इतने में आस-पड़ोसी भी वहां पहुंच गए। इसके बाद बेटी ने अपनी मां के ऊपर गिरे पत्थरों को आसपास के लोगों की मदद से हटाया। पड़ोसियों ने आपातकालीन सेवा को फोन कर मौके पर बुलाया।