हल्द्वानी। एक तरफ सेहत सुधारने के लिए बड़े-बड़े दावे हो रहे हैं तो दूसरी तरफ अस्पतालों में दवाओं का संकट गहराता जा रहा है। बेस अस्पताल में कई जरूरी दवाएं नहीं हैं तो महिला अस्पताल में आयरन खरीदकर महिलाओं को दिया जा रहा है।
बेस अस्पताल में इंसुलिन का इंजेक्शन पिछले 15 दिनों से नहीं है। एक माह में 50 से 60 वायल इंसुलिन की खपत होती है। 15 दिनों के भीतर लगभग सौ मधुमेह के मरीज बिना इंसुलिन के निराश लौट गए। गरीब मरीजों को इंसुलिन बाहर से खरीदने पड़े हैं। जबकि कैल्शियम भी पिछले 15 दिनों से अस्पताल में नहीं है। कैल्शियम की 10 हजार टेबलेट एक माह में खपती हैं। जबकि आयरन की तीन से चार हजार टेबलेट लगती है। आयरन की टेबलेट पिछले छह माह से नहीं है। बी कांप्लेक्स की हालत कुछ ऐसी ही है। बी कांप्लेक्स की टेबलेट पिछले तीन माह से बेस अस्पताल में नहीं है। एक माह में बी कांप्लेक्स की 50 हजार टेबलेट की खपत होती है।
दूसरी ओर महिला अस्पताल में आयरन की टेबलेट खरीदकर गर्भवती महिलाओं को दी जा रही है। एक माह में 12 से 15 हजार आयरन की टेबलेट की खपत होती है। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. भगीरथी जोशी ने बताया कि प्रतिमाह लगभग 25 हजार आयरन की टेबलेट खरीद रहे हैं। जबकि आरएच निगेटिव महिलाओं को लगने वाला इंजेक्शन भी नहीं है। इंजेक्शन भी बाजार से खरीदकर लगाए जा रहे हैं। डॉ. जोशी ने बताया कि इस बार की सूची में इंजेक्शन का नाम आया है और जल्द मिल जाएगा।
सभी दवाएं स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर से आती हैं। कंप्यूटर के माध्यम से दवाओं का विवरण भेजा जा चुका है। मरीज दवाएं जनऔषधि केंद्र या बाजार से खरीद रहे हैं। सात तारीख को दवाएं देने के लिए बुलाया है। तभी पता चलेगा कि कौन-कौन सी दवाएं मिलीं। -डॉ. एसबी ओली, सीएमएस, बेस अस्पताल
ईएनटी सर्जन ने किया ज्वाइन
हल्द्वानी। बेस अस्पताल में ईएनटी सर्जन की काफी समय से मांग हो रही थी। बुधवार को ईएनटी सर्जन डॉ. अनिल गंगवार ने ज्वाइन कर लिया। बेस अस्पताल में रेडियोथैरेपी के डॉ. कौशल को भी भेजा गया है। जबकि रेडियोथैरेपी से संबंधित कोई भी काम बेस अस्पताल में नहीं है। कैंसर से जुड़े अस्पतालों में रेडियोथैरेपिस्ट की जरूरत होती है। बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसबी ओली ने बताया कि डॉ. गंगवार ने ज्वाइन कर लिया है मगर डॉ. कौशल ने ज्वाइन नहीं किया है।