नैनीताल। पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने का दावा कर रही प्रदेश सरकार को अब और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने संविधान की व्यवस्था के तहत पंचायतों को 29 विषयों के अधिकार न देने के मामले में सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ऊधमसिंह नगर की ग्राम पंचायत बरहैनी की ग्राम प्रधान बलविंदर कौर ने याचिका दायर कर कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 243-जी में पंचायतों को अधिकार संपन्न बनाने को कहा गया है। वहीं 11 वीं अनुसूची में 29 विभिन्न अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी दी गई है।
पंचायतों को यह अधिकार देने के लिये राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं। याचिका में यह भी कहा कि उत्तराखंड सरकार ने नया पंचायती राज अधिनियम 2016 लागू किया गया है। इसमें भी ग्राम पंचायतों को 29 अधिकार देने का प्रावधान है। वास्तव में सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। याचिका में ग्राम पंचायत को हाट बाजार, शुल्क और अन्य करों के अतिरिक्त सभी 29 अधिकार देने की प्रार्थना की गई है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं।
दो सप्ताह में शपथपत्र पेश करने का निर्देश
सरकार के खिलाफ है पंचायतों को 29 विषयों के अधिकार न देने की याचिका