नैनीताल। पंडित गोविंद बल्लभ पंत चिड़ियाघर प्रशासन बाघ का कुनबा बढ़ाने के लिए विशेष आईसीयू बनाने की तैयारी में है। बता दें कि हाल ही में चिड़ियाघर में जन्मा बाघ का शावक दो दिन में ही मर गया था। दोबारा ऐसा न हो इसलिए आईसीयू की जरूरत समझी जा रही है। वन विभाग इसके लिए बजट की व्यवस्था करने में जुट गया है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो यह उत्तर भारत का पहला आईसीयू होगा।
बाघ समेत कई ताकतवर जानवरों के बच्चों में शुरूआत के दो सप्ताह तक रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। शुरूआत के 15 दिन इन्हें बचाए रखना बहुत मुश्किल होता है। मार्च में चिड़ियाघर में बाघिन ने एक शावक को जन्म दिया था। दशकों बाद बाघ का कुनबा बढ़ते हुए दिखाई दिया। चिड़ियाघर प्रशासन इस उपलब्धि से काफी खुश था, लेकिन जन्म लेने के दो दिन बाद ही बच्चे की मौत हो गई और बाघ का कुनबा बढ़ते-बढ़ते रह गया। दोबारा ऐसा न हो इसके लिए वन विभाग और चिड़ियाघर प्रशासन बड़े जानवरों के बच्चों के लिए आईसीयू बनाने की तैयारी कर रहा है। यह बहुत महंगा प्रोजेक्ट है, इसलिए बजट की कमी आड़े आ रही है। डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने बताया कि फीजेंट्स के बच्चों के लिए हमारे पास आईसीयू है। हम प्रयास कर रहे हैं कि बड़े जानवरों के बच्चों के लिए भी आईसीयू बनाया जाए ताकि यहां जन्म लेने वाले एक भी बच्चे की मौत न हो।
भालू, तेंदुआ, हिरन के बच्चों को भी रखा जा सकेगा
हाल ही में हो गई थी बाघ के शावक की मौत
रात्रिचर पक्षियों का अलग जोन बनेगा
डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने बताया कि चिड़ियाघर में रात्रिचर पक्षियों और जानवरों के लिए अलग जोन बनाया जा रहा है। इस जोन में रहने वाले पशु और पक्षियों के लिए चांदनी रात जैसा वातावरण बनाया जाएगा। हालांकि दर्शक बाहर से इन्हें देख सकेंगे। यह पूरा क्षेत्र चांद की नीली रोशनी में नहाया रहेगा।
अल्ट्रासाउंड बताएगा कब होगा बच्चे का जन्म
जानवरों के बच्चों का स्वास्थ्य और जन्म का समय आदि जानकारी करने के लिए रानीबाग स्थित वानर बधियाकरण केंद्र में अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित की जा चुकी है। अब यहां जानवरों का अल्ट्रासाउंड कर बीमारी, गर्भावस्था समेत तमाम जानकारियां हासिल की जा सकती हैं।