नैनीताल। पोलैंड से एमबीए कर चुके सॉलिन गुरुकुल के शीफू कनिष्क शर्मा ने नैनीताल में अनोखी पहल की है। उन्होंने पंगूट के पास महरोड़ा गांव में दो साल पहले सॉलिन गुरुकुल नाम से कुंग फू सिखाने का आश्रम शुरू किया। इसमें भारत के विभिन्न हिस्सों से 22 प्रशिक्षु आए हैं। उन्हें चीन से आए महागुरु शि यन फैंग, शि हिंग जुग आत्मरक्षा के लिए कुंग फू के गुर सिखा रहे हैं। चीनी महागुरुओं के शिष्य बाद में स्थानीय ग्रामीणों को भी आत्मरक्षा के गुर निशुल्क सिखाएंगे।
कनिष्क बताते हैं कि उनमें बचपन से कुंग फू सीखने की ललक थी। सात साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली से कुंग फू सीखने की शुरुआत की। इसके बाद सालों तक चीन में कुंग फू सीखा। हाल ही में उनका नाम पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। सात मार्च को ग्रांडमास्टर (महागुरु) शि यन फैंग, मास्टर (गुरु) शि हिंग जुग चीन से उनके गुरुकुल आए। गुरु, महागुरु साल में तीन बार उनके गुरुकुल में आते हैं। गुरु सात मार्च से युवक, युवतियों को आत्मरक्षा के गुर सिखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में चीनी पद्धति की दवाई गुरुकुल में मिलेंगी। ध्यान का सेंटर भी यहीं खोला जाएगा।
- सात कलाओं का दिया जा रहा प्रशिक्षण
कनिष्क बताते हैं कि उन्होंने देश के साथ ही विदेशों में कुंग फू की शिक्षा ली। इस समय वह विदेशों में भी कुंग फू सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि वह सॉलेन कुंग फू, काली, जीत कुंडे, ताइची, छईया, कुंग फू तुआ समेत सात कलाएं जानते हैं। गुरुकुल में प्रशिक्षुओं को सिखाते हैं। उनका कहना है कि उनकी शिक्षा किसी मेडल के लिए नहीं बल्कि आत्मरक्षा के लिए है। गुरुकुल में शिक्षा लेने वाले हमला होने पर अपनी सुरक्षा कर सकते हैं।