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एरीज ने किया तीन साल के वैज्ञानिक शोधों का मूल्यांकन

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नैनीताल। आर्यभट्ट विज्ञान प्रेक्षण शोध संस्थान (एरीज) की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की दो दिन चली बैठक में एस्ट्रोनॉमी, एस्ट्रो फिजिक्स, एटमॉसफियर साइंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय शोध किए जाने पर संतोष व्यक्त किया गया। समिति ने एरीज के पिछले तीन सालों के वैज्ञानिक शोधों का मूल्यांकन किया। समिति अपनी मूल्यांकन रिपोर्ट एरीज की गवर्निंग काउंसिल को भेजेगी। जिस आधार पर एरीज के भविष्य में प्रस्तावित योजनाओं को मूर्त रूप मिल सकेगा।
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एरीज की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्यों की शुक्रवार, शनिवार को एरीज सभागार में मैराथन बैठक हुई। समिति ने एरीज की प्रयोगशालाओं का निरीक्षण भी किया। समिति ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शोधार्थियों, स्टाफ से अलग-अलग वार्ता की। इस कमेटी के अध्यक्ष राष्ट्रीय रेडियो खगोल विज्ञान केंद्र पुणे के निदेशक प्रो. एसके बोस हैं। अन्य सदस्यों में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान मुंबई के प्रो. डीके ओझा, भारतीय खगोल भौतिकी विज्ञान संस्थान बंगलूरू केवी ईश्वर रेड्डी, अंतर विश्वविद्यालय खगोल विज्ञान केंद्र पुणे के प्रो. आनंद, रमन शोध संस्थान बंगलूरू के प्रो. विश्वजीत पाल, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. एचपी सिंह हैं जबकि सदस्य सचिव एरीज नैनीताल के निदेशक डॉ. एके पांडे हैं।

दूरबीन ने दिए उल्लेखनीय परिणाम
नैनीताल। दो दिन चली बैठक के बाद एरीज के वैज्ञानिक सलाहकार समिति के चेयरमैन प्रो. एसके घोष ने पत्रकारों को बताया कि देवस्थल में स्थापित एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर व्यास की दूरबीन ने अप्रत्याशित रूप से उल्लेखनीय वैज्ञानिक परिणाम दिए हैं। दो शोध अब तक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जनरल में छप चुके हैं। साथ ही देश विदेश के कई वैज्ञानिक यहां शोध करने आ चुके हैं। यूरोप के साइंस जनरल एल्सवीयर ने एरीज को एस्ट्रोनॉमी, एस्ट्रो फिजिक्स में उत्कृष्ट शोध के लिए दुनिया के टॉप फाइव शोध संस्थानों में शामिल किया है। एरीज के निदेशक प्रो. पांडे ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति का स्वागत किया। कमेटी की बैठक के संयोजक शैक्षिक कमेटी के चेयरमैन डॉ. मनीष नाजा, डॉ. शशिभूषण पांडे थे।
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