गरुड़ (बागेश्वर)। पलायन की मार के बावजूद भेटा गांव होली पर गुलजार रहता है। भेटा गांव के लोहुमी कुनबे की होली का खासा महत्व है। लोहुमी कुनबे के लोग फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को कोट भ्रामरी के मंदिर पहुंच कर होली की चीर बांधते हैं। इसमें पलायन कर चुके परिवार के कम से कम एक सदस्य का पहुंचना अनिवार्य होता है।
ब्लॉक मुख्यालय से करीब पांच किमी दूर स्थित भेटा गांव में लोहुमी कुनबा रहता है। वर्तमान में कोट भ्रामरी मंदिर में आचार्य भी लोहुमी कुनबे के लोग हैं। गांव के होली डांगर (होली के मुखिया) 76 वर्षीय नंदा बल्लभ लोहुमी बताते हैं कि कत्यूर घाटी की सबसे पुरानी होली भेंटा की है। उनके मुताबिक फाल्गुन के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को जब भेंटा गांव के लोग कोट भ्रामरी मंदिर में चीर बांधते हैं तब अन्य गांवों में एकादशी से खड़ी होली का गायन शुरू होता है।
गांव के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य जनार्जन लोहुमी ने बताया कि गांव के 80 फीसदी परिवार पलायन कर चुके है। वसंत पंचमी के दिन से गांव में बैठकी होली शुरू हो जाती है। होली का गायन बारी-बारी से हर घर में होता है। होली कमेटी के फरमान पर होली के अवसर पर पलायन कर चुके परिवार के एक सदस्य को होली के मौके पर घर पहुंचना अनिवार्य है।
ये पहल भी सराहनीय
भेटा गांव में होली गायन के दौरान होल्यारों को सिगरेट या बीड़ी नहीं बांटी जाती। जनार्जन लोहुमी के अनुसार होली कमेटी ने वर्ष 2000 में तय किया था कि होली गायन के दौरान नशे पर प्रतिबंध रहेगा। इसी के तहत अब होली के दौरान सिगरेट या बीड़ी के स्थान पर मिठाई बांटी जाती है। इसके अलावा होली गायन से पहले गांव के युुवाओं को बुजुर्ग होल्यार होली गायन के गुर भी सिखाते हैं।
ये रहे हैं होली डांगर
भेटा गांव के लोहुमी कुनबे के होली डांगर ईश्वरी दत्त लोहुमी, हरी दत्त, ख्याली दत्त, गोविंद बल्लभ रहे हैं। वर्तमान में नंदा बल्लभ लोहुमी होली डांगर हैं।
होली की धूम से रौनक
भेंटा गांव में होली की धूम से इन दिनों काफी रौनक है। गांव की होली चतुर्दशी के दिन कोट भ्रमरी मंदिर पहुंचेगी। लोहुमी कुनबा 23 फरवरी को होली की चीर बांधने कोट भ्रामरी मंदिर पहुंचेगा।