रानीखेत (अल्मोड़ा)। सुदूरवर्ती गांवों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। योजना होने के बावजूद स्याल्दे तहसील के सुदूरवर्ती आधा दर्जन गांव पिछले ढाई साल से पानी के लिए तरस रहे हैं। दरअसल यहां घटगाड़-देघाट सड़क निर्माण में सदे पंपिंग पेयजल योजना के पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गए, तब से इसे आज तक ठीक नहीं किया गया है। ग्रामीण कभी जल संस्थान तो कभी लोनिवि के चक्कर काटकर परेशान हैं। विभागों से भी ग्रामीणों को सार्थक जवाब नहीं मिल रहा।
सरमोली घटगाड़ से 1987 में सदे मेहरगांव पेयजल योजना बनी। इस योजना से सदे के अलावा तल्ला मेहरखोला, मल्ला मेहरखोला, रिखून, बाराखाल, बेल्जाण, तामाढूंन, पीपलगांव सहित कई इलाके जुड़े हुए हैं। वयोवृद्ध राज्य आंदोलनकारी पान सिंह रावत ने बताया कि ढाई साल पूर्व लोनिवि ने घटगाड़-देघाट सड़क निर्माण का कार्य शुरू कराया। जिसमें पेयजल योजना की लाइन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, तब से गांव में पानी नहीं पहुंच रहा।
बरसात कम होने के कारण पारंपरिक जल स्रोत भरे नहीं हैं। जिसके चलते भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जानवरों के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं हो रहा। जिलाधिकारी ने तक इस योजना को दुरुस्त करने के आदेश दिए हैं, लेकिन जल संस्थान और लोनिवि के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही।