हल्द्वानी। कर चोरी रोकने के लिए अब राज्य कर महकमा अब नई रणनीति बना रहा है। अब यूपी के जिलों से आने वाले ईंट आदि सामान का बिल एकत्र कर वेरिफाई करने के लिए संबंधित जिलों को भेजेगा। यह तय किया जाएगा कि इस खरीद फरोख्त को व्यापारी ने अपने बिक्री ब्योरे में दर्शाया है या नहीं। गैर पंजीकृत व्यापारियों के यहां भी जांच की जाएगी। ताकि प्रमाणित हो कि गैर पंजीकृत की आड़ में कर चोरी का माल तो नहीं मंगाया जा रहा है।
नैनीताल जनपद में रामपुर, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत से ईंट, खाद्य तेल, आयरन स्टील आदि सामान आता है। इनमें ईंट का बिल 50,000 से कम होता है। यहीं से खेल शुरू होता है। 50 हजार से कम कीमत होने पर इनका ई वे बिल जारी नहीं होता है। ईंट का बिल बना भी होता है तो जीएसटी में गैर पंजीकृत व्यापारी के नाम से बना होता है। जीएसटी में गैर पंजीकृत व्यापारी के नाम से होने पर राज्य कर अधिकारी बिल की सत्यता नहीं जांच पाते हैं। वही दूसरे प्रदेश का बिल होने की वजह से माल के साथ आ रहे बिल की वैधता भी प्रमाणित नहीं हो पाती है। इससे कर चोरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
सचल दस्ते ने एकत्र किए हैं 1800-2000 बिल
राज्य कर के सचल दस्ते ने दो हफ्ते लगातार बरेली रोड, कालाढूंगी रोड, रामपुर रोड पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। ईंट की ट्रालियों, खाद्य तेल और आयरन स्टील के प्रांतीय और अंतर प्रांतीय 1800-2,000 बिल एकत्र हुए हैं। इनमें अंतर प्रांतीय बिलों को जांच के लिए उप्र भेजा जाएगा।
राज्य सरकार को लगता है लाखों का चूना
ईंट पर 5 फीसदी, खाद्य तेल पर 5 फीसदी और आयरन स्टील पर 18 फीसदी कर होता है। रोजाना 50-100 वाहन आते हैं लेकिन 50 हजार से कम कीमत होने पर बिल नहीं बनता है। नतीजा सरकार को हर माह लाखों का चूना लगता है।
ईंट आदि पर ई वे बिल नहीं होता है, सिर्फ माल का बिल मिलता है। यह बिल गैर पंजीकृत व्यापारियों के नाम से होता है। इन बिलों को एकत्र किया गया है, अब जांच के लिए उप्र के राज्य कर अधिकारियों को भेजे जाएंगे। इसका मकसद कर चोरी रोेकना है।
-विनय प्रकाश ओझा, सचल दस्ता प्रभारी, राज्य कर