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राष्ट्रपति से शौर्य पदक लेकर लौटी वीरांगना

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हल्द्वानी। जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में दो आतंकियों को ढेर करने वाले शहीद नायक चंदर सिंह कार्की की पत्नी चंद्रकला को पति की शहादत पर फख्र है। हालांकि, उनका कहना है कि आतंकवादियों से हो रही मुठभेड़ में रोजाना सैनिक शहीद हो रहे हैं। सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। सिर्फ पैसा देकर पिंड छुड़ाना ठीक नही हैं।
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राष्ट्रपति से शौर्य चक्र लेकर घर लौटीं चंद्रकला ने कहा कि उन्हें सरकार ने सब कुछ दिया लेकिन वह चाहती हैं कि सीमा पर तैनात जवानों के घर वालों को ऐसा दिन न देखना न पड़े, सरकार को इस बारे में भी सोचना चाहिए। पिथौरागढ़ जिले के पुंगराऊ पाखू थल निवासी चंदर सिंह का जन्म 30 जून 1978 को हुआ था। पिता हर्ष सिंह कार्की से उन्होंने पढ़ाई के समय ही सेना में जाने की इच्छा जताई थी। 22 जून 1995 को चंदर सिंह कार्की कुमाऊं स्काउट में भर्ती हुए। कुछ दिनों बाद उनकी तैनाती 13 राष्ट्रीय राइफल्स में हुई। उन्हें 25 नवंबर 2016 को कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में तैनात किया गया था। चंदर दो आतंकियों को ढेर करते हुए शहीद हो गए। उनकी बहादुरी और वीरता को देखते हुए सेना ने मरणोपरांत शौर्य चक्र देने का निर्णय लिया। 27 मार्च 2018 को राष्ट्रपति राम कोविंद ने चंदर सिंह की वीरांगना चंद्रकला को दिल्ली में शौर्य चक्र पदक दिया। शहीद की 11 और आठ साल की दो बेटियां हैं। चंद्रकला का कहना है कि वह बच्चों को पढ़ाने के लिए कठघरिया में किराए का कमरा लेकर रहती हैं। उनकी सास कौशिल्या देवी अपने गांव में रहती हैं। चंदर सिंह तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। छोटा भाई साधु सिंह कार्की डीडीहाट अस्कोट में शिक्षक हैं। बड़े भाई बुलंदशहर जलसंस्थान में कार्यरत हैं।
सैनिक कल्याण विभाग ने की मदद
चंद्रकला ने बताया कि यहां आने पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने काफी मदद की। उन्हें केंद्र और राज्य सरकार से मदद दिलाने में उन्होंने सहयोग किया।
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शौर्य चक्र पदक विजेता के परिवार को मिलती हैं ये सुविधाएं
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि शौर्य चक्र विजेता शहीद के बच्चों को मुफ्त शिक्षा के तहत स्कूल फीस, कॉपी किताब और बस भाड़ा भी सरकार प्रदान करती है। रेलवे मेें यात्रा के लिए एक सहायक के साथ किराया माफ रहता है। केंद्र सरकार एकमुश्त 15 लाख और प्रतिवर्ष एक-एक हजार रुपये आजीवन प्रदान करती है। प्रतिमाह छह हजार रुपये मिलने का प्रावधान है। राज्य सरकार की तरफ से दस लाख रुपये मिलता है।
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