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आइबिस्बिल के ना आने से पक्षी प्रेमी निराश

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रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) और इसके आसपास के इलाके हिमालय पर्वत प्रणाली के महत्वपूर्ण स्थानों में शुमार हैं। यह इलाके अपनी ऊंचाई, राहत, तापमान में भिन्नता के कारण जाड़ों के मौसम में प्रवासी पक्षियों को आसरा देता है। इन प्रवासी पक्षियों में दुर्लभ प्रजाति के आइबिसबिल पक्षी भी शामिल होते थे लेकिन इस साल यह पक्षी न दिखने से प्रकृति प्रेमी चिंतित हैं। इसलिए जनवरी से इन पक्षियों पर सर्वे किया जाएगा।
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आइबिसबिल पक्षी हर साल अक्तूबर आखिरी सप्ताह या नवंबर प्रथम सप्ताह में तीन माह के सालाना प्रवास के लिए कोसी नदी में आती है जो इस बार किसी को नहीं दिखी है। यह बहुत सुंदर पक्षी है, जिसकी भूरी और सफेद रंग की बेली, लाल पैर, घुमावदार लाल लंबी चोंच होती है! यह पक्षी छद्म आवरण में माहिर होता है। इसलिए यह आसानी से नजर नहीं आता। हर साल इस हिमालयी पक्षी को देखने के लिए देश, विदेश से लाखों सैलानी आते हैं। वन्यजीव फोटोग्राफर दीप रजवार बताते हैं कि वह वर्ष 2010 से इस पक्षी को अपने कमरे में कैद करते रहे हैं लेकिन इस बार इसका न दिखना अशुभ संकेत है। उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र में इस बार अधिक ठंड न पड़ना इसका एक कारण हो सकता है क्योंकि जाड़ों में उच्च हिमालयी क्षेत्र की नदियों में बर्फ जमने के कारण यह निचले, कम ठंडे स्थानों की ओर प्रवास करने आते हैं, जहां इन्हें भोजन की कमी नहीं होती है। हालांकि दूषित पानी, ध्वनि प्रदूषण, मोबाइल टावर के विकिरण भी अन्य कारण हो सकते हैं। सीटीआर के उपनिदेशक अमित वर्मा ने भी माना कि इस बार प्रवासी पक्षी कम आए हैं। इसके लिए जनवरी से पार्क क्षेत्र में सर्वे किया जाएगा, ताकि जैवविविधता में हुए बदलाव के असली कारणों का पता चल सके।
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