नैनीताल। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा पाये हत्या के दूसरे आरोपी बेटे की आजीवन कारावास की सजा को तीन साल की कैद की सजा में तब्दील कर दिया है। आरोपी को सितारगंज जेल से लाकर शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया गया। पूर्व में आरोपी को कोर्ट में पेश करने के आदेश जेल अधीक्षक सितारगंज को दिए गए थे। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवम न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। बन भूलपुरा (हल्द्वानी) निवासी फिरोज खान ने तीन फरवरी 2016 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि फिरोज और उसके पिता दुकान पर थे। तभी पुत्तन की पुत्री 50 रुपये का नोट लेकर दुकान में सामान लेने के लिए आयी और उसने 20 रुपये का सामान खरीदा। इसके पिता ने लड़की को 30 रुपये वापस दिए। घर पहुंचकर पुत्तन की बीबी ने लड़की से बाकी बचे रुपये वापस मांगे तो लड़की ने बताया कि बाकी बचे पैसे दुकानदार ने वापस नहीं किए। इस पर पुत्तन और उसका लड़का आदिल गुस्से में दुकान पर आये। उन्होंने फिरोज के पिता शमीम और माता पर लाठी डंडे से वार किया। इसमे पिता शमीम की मौके पर ही मौत हो गयी। इस प्रकरण पर निचली अदालत में विपक्ष ने 13 गवाह पेश किये। निचली अदालत ने 29 अप्रैल 2017 को दोनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। निचली अदालत के इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया की डॉक्टर की रिपोर्ट और फोरेंसिक रिपोर्ट में भिन्नता है। खंडपीठ ने डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाया कि शमीम की मौत हृदय घात हुई है। न्यायालय ने पुत्तन को इसी का लाभ देते हुए पूर्व में बरी कर दिया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियुक्त के बेटे की आजीवन कारावास की सजा को बदलकर तीन साल की कैद कर दी।