नैनीताल। उच्च न्यायालय ने हरिद्वार में हत्या के प्रयास किये जाने के मामले में निचली अदालत की ओर से आठ फरवरी 2012 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। इसमे एडिशनल सेशन जज हरिद्वार ने अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया था।
सुनवाई के दौरान 25 अगस्त 2011 को अभियुक्त कालवा की मृत्यु हो गई थी। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 12 नवंबर 2002 को हरिद्वार निवासी सीताराम ने थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखाई थी। इसमें कहा था कि 10 नवंबर 2002 को अभियुक्त कालवा उसकी दुकान पर शराब पीकर आया और उसे धमकाने लगा। उसके 15 मिनट बाद कालवा, आजाद ए राम सिंह और मूसा पिस्टल लेकर आये और कालवा ने उस पर गोली चलाई लेकिन वह किसी तरह बच गया। इस प्रकरण में निचली अदालत ने अभियुक्तों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया था। निचली अदालत के इस आदेश को सरकार ने चुनौती दी थी। पक्षों की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने सरकार की अपील को ख़ारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।