नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में बुधवार को कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल की अध्यक्षता में इतिहास विभाग के पाठ्यक्रम समिति की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में ‘उत्तराखंड का इतिहास’ को एक विशिष्ट विषय के रूप में पढ़ाए जाने की मंजूरी प्रदान की गई। बैठक में विषय को पढ़ाने के लिए सात प्राध्यापकों व छह शिक्षणेत्तर कर्मियों के पदों के सृजन के लिए स्वीकृति प्रदान कर शासन को भेजने का प्रस्ताव पारित किया गया।
बैठक में इतिहास विभाग के संयोजक व विभागाध्यक्ष प्रो. गिरधर सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड का इतिहास विषय लागू हो जाने के बाद विद्यार्थियों को उत्तराखंड के बारे में पूरी जानकारी मिल सकेगी। साथ ही प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को भी फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से छात्रों की मांग थी कि विभाग में उत्तराखंड का इतिहास विषय को एक विशिष्ट विषय के रूप में लागू किया जाए।
बैठक में चौधरी चरण सिंह मेरठ विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. केके शर्मा व गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार के प्रो. राकेश शर्मा, प्रो. अनिल जोशी, प्रो. बीडीएस नेगी, प्रो. संजय कुमार टम्टा, प्रो. सावित्री कैड़ा जंतवाल, डा. हीरा सिंह भाकुनी, डा.रितेश साह, डा.शिवानी रावत, डा.निर्मल बसेड़ा व डा.मनोज बाफिला मौजूद थे।