नैनीताल। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ कवि और पत्रकार मंगलेश डबराल ने कहा कि सोशल मीडिया से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बढ़ी है। सोशल मीडिया के माध्यम से हर तबका और घरेलू महिलाएं भी लेखन के क्षेत्र में आ रहे हैं। इससे साहित्य सशक्त होने के साथ ही अधिक लोकतांत्रिक हुआ है।
डबराल रविवार को नैनीताल में गिर्दा-वीरेनदा स्मृति कवि सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान हुई वार्ता में उन्होंने कहा कि धर्म और परंपराओं में बाजारवाद हावी हो रहा है। हमारी संस्कृति पर हमला कर उसे विकृत किया जा रहा है। यह चिंता का विषय है। हिंदी कविता हमेशा से ही अमानवीय शक्तियों के विरोध में खड़ी रहती है। कहा कि बाजार से साहित्य को तय नहीं किया जा सकता है। टीवी चैनलों में संस्कृति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है जिसकी वजह से समाज के समक्ष प्रभावशाली संदेश नहीं पहुंच पा रहे हैं। डबराल ने कहा कि वर्तमान में नई पीढ़ी के लेखक विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से लेखन कार्य कर रहे हैं, जो सामाजिक हितों के लिए अनुकूल है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भाषा को बचाने का काम साहित्य का है जो साहित्य कर भी रहा है।
फोटो सहित 20एनटीएल 08पी से