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सैमेस्टर प्रणाली में नए अध्यादेश को अगले सत्र से लागू करने का फैसला

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प्रथम सेमेस्टर में फेल होने वाले हजारों छात्र-छात्राएं होंगे प्रमोट
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नैनीताल।
कुमाऊं विश्वविद्यालय विद्या परिषद की बैठक में स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली में नया अध्यादेश अगले सत्र से लागू करने का फैसला लिया गया। विद्या परिषद के इस निर्णय से विश्वविद्यालय के उन हजारों छात्र-छात्राओं को राहत मिलेगी, जो इस अध्यादेश के चलते अनुत्तीर्ण हो गए थे।

अध्यादेश की खामियों को अमर उजाला ने दो जून को उजागर किया था। उसके बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय को विद्या परिषद की बैठक बुलानी पड़ी, जिसमें यह फैसला लिया गया। कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को तीन साल बाद विद्या परिषद की बैठक हुई, जिसमें विद्या परिषद ने छात्रों की मांग को देखते हुए नए अध्यादेश को अगले सत्र से लागू करने का फैसला लिया और तय किया कि इस बार स्नातक स्तर पर प्रथम सेमेस्टर के परिणाम पुराने नियमानुसार ही घोषित किए जाएंगे।
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इस फैसले से स्नातक स्तर के प्रथम सेमेस्टर में फेल होने वाले हजारों छात्र-छात्राएं द्वितीय सेमेस्टर में प्रमोट हो जाएंगे। विद्या परिषद ने कला, वाणिज्य, विज्ञान संकाय मंडलों की बैठकों में पारित निर्णयों का भी अनुमोदन किया। प्रवेश समिति की तीन मई और 30 मई को हुई बैठकों में लिए गए निर्णयों को भी मंजूरी दी, जिसमें नए प्रवेश के लिए नियम तय किए गए थे।

इन नियमों के मुताबिक बीएससी के विषयों को चार वर्गों में बांटकर उनका कांबिनेशन बनाया गया है और इसी के आधार पर छात्रों को विषय चयन करने होंगे। विवि से संबद्ध समस्त डिग्री कॉलेजों में प्रवेश के लिए न्यूनतम 40 फीसदी अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

विद्या परिषद ने विधि संकाय अल्मोड़ा के प्राचार्य प्रो. एचडी शर्मा को राष्ट्रपति द्वारा राजश्री पुरुषोत्तम दास टंडन सम्मान देने पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। बैठक में कुलसचिव प्रो. डीसी पांडे, उपकुलसचिव बहादुर सिंह बिष्ट, परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. आरएस पथनी, कला संकायाध्यक्ष प्रो. बीएस बिष्ट, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. संतोष कुमार, वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. पीसी कविदयाल, प्रो. बीके सिंह, प्रो. एसएस मेवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक प्रो. रजनीश पांडे, विधान चौधरी, पीसी पांडे आदि थे।
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इसलिए बदलाव की मांग उठी

नए अध्यादेश के मुताबिक स्नातक स्तर पर प्रत्येक सेमेस्टर में परीक्षार्थी को तीन में से दो विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य था। इसके चलते इस बार स्नातक स्तर पर प्रथम सेमेस्टर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हो गए। तभी से छात्र नेता इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं।


- सेमेस्टर प्रणाली में नया अध्यादेश अगले सत्र से लागू होगा
- तीन साल बाद हुई कुविवि विद्या परिषद की बैठक में फैसला
- अमर उजाला खबर का असर
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