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पहले लोग अपने प्रिय नेताओं के भाषण सुनने के लिए पैदल चले आते थे

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neta ji
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हल्द्वानी। वयोवृद्ध 91 वर्षीय मोतीराम भट्ट लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा एक-दूसरे के ऊपर कीचड़ उछालने से आहत हैं। वह कहते हैं कि पुराने दौर के और अब के चुनाव में काफी परिवर्तन आया है, अच्छी राजनीति भी अब गंदी हो गई है। पहले लोग जनता का भला करने के लिए चुनाव लड़ते थे, अब वो बात कहां।
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उत्तरांचल विहार निवासी मोतीराम भट्ट ने अंग्रेजी हुकूमत के दौर में शुरू हुए राशनिंग विभाग में 10 अक्तूबर 1948 को देहरादून में कर्मचारी के पद पर नौकरी शुरू की जो कि वर्ष 1949 में विभाग टूट गया। वह सेल्सटैक्स विभाग में चले गए। पहली ज्वाइनिंग बरेली में मिली। इसके बाद दिसंबर 1962 में मोतीराम भट्ट हल्द्वानी में दफ्तर खुलने पर यहां आ गए। वह वर्ष 1990 में रिटायर हुए। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा कर कहते हैं कि पहले लोग अपने नेता को सुनने के लिए दूर-दूर से पैदल चल कर पहुंचते थे, एक बार उनकी चुनाव में ड्यूटी अल्मोड़ा के पनुवानौला में लगी थी लेकिन उन्हीं दिनों चुनावी रैली को संबोधित करने अल्मोड़ा में जवाहर लाल नेहरू आने वाले थे जिन्हें सुनने के लिए वे अपने साथियों के साथ पैदल ही पहुंच गए थे। चाहें स्वर्गीय इंदिरा गांधी हो या स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी, ये ऐसे नेता रहे हैं, इनके भाषण में आकर्षण होता था लेकिन अब भाषण सिर्फ एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों तक सिमट कर रह गए हैं। उन्होंने बताया कि पहले के दौर में हाथ से पर्ची लिखकर चुनाव होता था लेकिन अब तो पानी की तरह पैसा बहाया जाता है।
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‘पहले लोग अपने प्रिय नेताओं के भाषण सुनने पैदल चले आते थे’
वयोवृद्ध 91 वर्षीय मोतीराम भट्ट चुनावों में एक दूसरे के ऊपर कीचड़ उछालने से हैं आहत
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