रानीखेत (अल्मोड़ा)। मजखाली स्थित राज्य जैविक कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र में महिला काश्तकारों का पांच दिनी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। यहां चमोली और पौड़ी की महिलाओं को जैविक खेती के गुर सिखाए जा रहे हैं। काश्तकारों ने जैविक खाद बनाने का ज्ञान भी प्राप्त किया। कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र में काश्तकारों को खेती के माध्यम से आजीविका कमाने के तौर-तरीके बताए गए।
मालूम हो कि प्रशिक्षण केंद्र में इस तरह के शिविरों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पांच दिनी प्रशिक्षण में गढ़वाल के चमोली और पौड़ी जिले के 30 सदस्यीय काश्तकारों का दल पहुंचा हुआ है। केंद्र के प्रभारी डॉ. डीएस नेगी सहित तमाम प्रशिक्षकों ने जहां केंद्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी, वहीं जैविक खेती की बारीकियां भी समझाई गईं।
बर्मी कंपोस्ट, वर्मी वसा, सीपीपी तरल आदि जैविक खाद और तरल खाद बनाने के बारे में भी बताया गया। डॉ. सुमन महान, प्रशिक्षण प्रभारी मनोह अधिकारी, धूम सिंह नेगी, नीरज अधिकारी सहित तमाम विशेषज्ञों ने काश्तकारों को व्याख्यान भी दिए।