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मांगों को लेकर भड़की आशाएं, केंद्र पर लगाया गुमराह करने का आरोप

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। न्यूनतम मासिक वेतन देने, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने सहित तमाम मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने यहां मोर्चा खोल दिया है। तहसील परिसर में प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे गए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि विषम परिस्थितियों में कार्य करने के बावजूद सरकार उनके साथ वादाखिलाफी कर रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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ताड़ीखेत ब्लॉक की आशा कार्यकर्ता सुबह यहां तहसील परिसर में एकत्रित हुईं और नारेबाजी की। कहा कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा आज तक नहीं दिया गया है।

आशाओं ने राज्य सरकार द्वारा घोषित दो हजार रुपये मासिक मानदेय शीघ्र देने और घोषणा की तिथि से अब तक के एरियर का भुगतान करने, वार्षिक राज्य प्रोत्साहन राशि की बकाए धनराशि का भुगतान आशाओं के खातों में डालने, आशाओं को गांव में रहने के तुगलकी फरमान वापस लेने, कंडोम के वितरण पर शीघ्र रोक लगाने की मांग उठाई। कहा कि केंद्र सरकार आशाओं के मानदेय को दोगुना करने की घोषणा कर रही है, जबकि आशाओं को केंद्र सरकार की तरफ से कोई मासिक मानदेय तक नहीं दिया जाता है। कहा कि झूठे आश्वासनों के माध्यम से आशाएं अब गुमराह नहीं होंगी।
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संयुक्त मजिस्ट्रेट हिमांशु खुराना के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे गए। इस मौके पर अध्यक्ष कमला जोशी, भावना बिष्ट, शोभा बिष्ट, गीता देवी, प्रेमा नेगी, हीरा नेगी, पुष्पा तिवारी, शांति चौधरी, प्रतिभा देवी, चंपा मेहरा, हेमा पांडे, राधा देवी, मीना आर्या, गरिमा, सरोज सहित तमाम आशाएं मौजूद रहीं।
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