हल्द्वानी। निजी कंपनियों ने तेजी से दूध बाजार पर कब्जा कर लिया है। इससे उत्तराखंड कोऑपरेटिव डेरी फेडरेशन (यूसीडीएफ) के सामने दूध बेचने का संकट खड़ा हो गया है। यूसीडीएफ रोजाना 30 हजार लीटर दूध ज्यादा खरीद रहा है, पर उसे बेचने के लिए मार्केट नहीं मिल रहा है। दूध से पाउडर बनाकर मदर डेयरी को बेचने की योजना को भी झटका लगा है। ऐसे में जल्द ही यूसीडीएफ की बोर्ड बैठक होने की संभावना है, इसमें समस्या के हल के लिए कुछ कड़े फैसले भी लिए जा सकते हैं।
यूसीडीएफ दुग्ध संघों के माध्यम से राज्य में पशुपालकों का दूध खरीदता है। इसके बाद इसे आंचल ब्रांड के नाम से बाजार में बेचता है। जून में यूसीडीएफ की दुग्ध खरीद प्रतिदिन 1,90,961 लीटर थी। उधर बिक्री मात्र 160302 लीटर प्रतिदिन थी। ये हाल तब था जब गर्मियों में दूध, दुग्ध पदार्थों की बिक्री बढ़ जाती है। जुलाई में ये खरीद करीब दो लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गई है जबकि बिक्री नहीं बढ़ी है। कोऑपरेटिव होने के कारण यूसीडीएफ पशुपालकों से दूध खरीदना बंद या कम भी नहीं कर सकता है। अब बाजार की चुनौतियों से निपटने के लिए यूसीडीएफ की जल्द ही बोर्ड बैठक होने वाली है, जिसमें कुछ कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
दूध पाउडर बनाने में भी हो रहा है घाटा
यूसीडीएफ से जुड़े दुग्ध संघ अतिरिक्त दूध को पाउडर, बटर बनाने के लिए मेरठ भेजते हैं। दूध से पाउडर बनाने में दुग्ध संघों को 250 रुपये प्रति किग्रा लागत आती है। उधर, खुले बाजार में दूध पाउडर का दाम 150 रुपये प्रति किग्रा है। इसमें भी दुग्ध संघों को घाटा उठाना पड़ रहा है।
राज्य में 20-25 हजार लीटर दूध और बढ़ेगा
राज्य सरकार का सेना से एक समझौता हुआ है। इसके तहत सेना की ओर से अच्छी नस्ल की दुधारू गायों को राज्य के पशुपालकों को सस्ते दामों में उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के तहत राज्य में करीब दो हजार गाय आ चुकी हैं। यूसीडीएफ के अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक इस योजना से राज्य में करीब 20-25 लीटर दूध और बढ़ जाएगा।
मार्केट शेयर गिरने के ये हैं कारण
- निजी कंपनियों की आक्रामक मार्केटिंग
- यूसीडीएफ कर्मचारियों का ढीलापन
- दुग्ध संघों की आपसी प्रतिस्पर्धा
- राज्य में दूध के दाम अन्य राज्यों से अधिक होना
निजी कंपनियों का शेयर मार्केट में बढ़ा है। आंचल दूध की बिक्री बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए नीति बनाई जा रही है।
- संजय खेतवाल, प्रबंध निदेशक यूसीडीएफ