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250 प्रति वर्ग मीटर का भी नहीं किया गया पालन

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हल्द्वानी। नगर निगम के सीमा विस्तार में कई मानकों की अनदेखी भी की गई। गांवों को शहरी क्षेत्र में शामिल करने के लिए एक अति महत्वपूर्ण मानक है गांव का शहर जैसा होते जाना। अधिसूचना जारी होने के बाद अब यह भी उभर कर सामने आया है कि गांवों को शहर में शामिल करने की जल्दबाजी में इस सबसे महत्वपूर्ण मानक की ही ढंग से पड़ताल नहीं की गई। साफ है कि सीमा विस्तार की प्रक्रिया में कई खामियां रह गईं। सोमवार को यह मामला उच्च न्यायालय भी पहुंच सकता है। उच्च न्यायालय में देहरादून नगर निगम सहित 14 शहरी निकायों का मामला पहले से ही विचाराधीन है।
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गांव में शहरी गुण विद्यमान होने चाहिए
नियम कहता है कि गांव में शहरी गुण होने चाहिए। शहरी गुण से तात्पर्य कालोनी, जनसंख्या घनत्व, बाजार, अस्पताल, परिवहन की सुविधा से है। छड़ायल सुयाल, जयसिंह, भगवानपुर बिचला, हिम्मतपुर गांवों में कुछ जगह तो शहरी गुण विद्यमान हैं लेकिन मुख्य सड़क को छोड़कर अंदर पूरे भाग में ऐसा नहीं हैं। दूर-दूर तक खेती की जमीन है।

जनसंख्या घनत्व का भी नहीं किया गया पालन
नगर निगम की सीमा में गांव को शामिल करने के लिए मैदानी क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व 250 प्रति वर्ग किलोमीटर होना चाहिए। शनिवार को अमर उजाला की टीम ने जब गौजाजाली दक्षिण, भगवानपुर बिचला, भगवानपुर जयसिंह, छड़ायल सुयाल आदि का जायजा लिया तो यहां बड़े-बड़े खेत और दूर-दूर आबादी थी। यहां ये मानक पूरा नहीं हो रहा था।
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46 प्रतिशत दिखा दी कृषि भूमि
नगर निगम विस्तार में समिति ने आपत्तियों को सही ढंग से नहीं सुना। तहसील की रिपोर्ट सिर्फ कागजी थी। हरिपूर्ण पूर्णानंद सिटी अस्पताल बरेली रोड के सामने और बरेली रोड से लगता हुआ गांव है। यहां जनसंख्या घनत्व गौजाजाली उत्तर, दक्षिण और बिचली से अधिक है। इसके बावजूद इस गांव में कृषि भूमि 46 प्रतिशत दिखाई गई है। हकीकत में कृषि भूमि यहां 20 प्रतिशत के आस-पास होगी। इसके बावजूद इस गांव को नगर निगम की सीमा में शामिल नहीं किया गया। जबकि गौजाजाली उत्तर, दक्षिण और बिचली को शामिल कर दिया गया।

30 परिवार, कृषि भूमि फिर भी शामिल हो गया गांव
गौजाजाली दक्षिण में एक स्टोन क्रशर और करीब 30 परिवार हैं। इसका एक भाग गौला नदी और जंगल से लगता है। स्टोन क्रशर और स्टॉक को छोड़कर इस गांव में खेती होती है। लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। इसके बाद भी इस गांव को नगर निगम में शामिल कर दिया गया।

जन प्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि शासन ने उनकी आपत्ति निस्तारण के लिए सुनी ही नहीं। जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद और ब्लॉक प्रमुख भोला दत्त भट्ट ने कहा कि आपत्ति सुनने के दौरान उनकी जब नहीं सुनी गई तो उन्होंने विरोध दर्ज कराते हुए धरना प्रदर्शन किया था। ऐसे में कोई आपत्ति दर्ज करने वाला कार्यालय में पहुंचा ही नहीं तो इन्होंने कैसे आपत्तियों का निस्तारण कर दिया।

सोमवार को हाइकोर्ट में दायर हो सकती है याचिका
ब्लाक प्रमुख भोला भट्ट ने कहा कि मूल प्रस्ताव में 31 गांव थे। बाद में कमेटी की ओर से पांच गांव के प्रस्ताव और भेजे गए। ये किस आधार पर भेजे गए, इसे लेकर सोमवार को हाइकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
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