नैनीताल। उच्च न्यायालय ने एनएच-74 घोटाले के आरोपी और निलंबित विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी डीपी सिंह की याचिका खारिज कर दी है। न्यायालय ने डीपी सिंह की गिरफ्तारी पर लगी रोक को भी हटा दी है। अब डीपी सिंह की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है।
शनिवार को न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के घोटाले में निलंबित किए गए तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह ने याचिका दायर कर कहा था कि एनएच 74 घोटाले मामले में उनके खिलाफ हुई कार्रवाई की सीबीआई जांच की जाए। डीपी सिंह के मुताबिक जब यह घोटाला उजागर हुआ तो राज्य सरकार ने पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी में तत्कालीन मंडलायुक्त डी. सैंथिल पांडियन भी थे। इस कमेटी की एक बैठक भी नहीं हुई।
याचिका में कहा कि कृषि भूमि को व्यावसायिक श्रेणी की दिखाकर मुआवजा हड़पने के आरोप गलत है। भू स्वामियों को सर्किल रेट के आधार पर मुआवजे का भुगतान किया गया है। सरकार का करोड़ों रुपये का राजस्व बचाया गया है। सरकार के आदेश पर आयकर विभाग ने उनके आवास पर छापा मारा, लेकिन विभाग को उनके घर से तीन लाख रुपये के अलावा कुछ नहीं मिला और उनके तीन खाते सीज कर किए गए। एकलपीठ ने पक्षों की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही डीपी सिंह की गिरफ्तारी पर लगी रोक को भी हटा दिया गया है।