नैनीताल। मंडलायुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने कहा है कि वैज्ञानिकों, गणमान्य लोगों के सुझाव, विभिन्न संस्थाओं की सर्वे रिपोर्टों के आधार पर ही नैनीताल शहर, झील संरक्षण कार्यों को कराया जाएगा। उन्होंने झील जलागम क्षेत्र के नालों का संरक्षण एवं नियमित सफाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झील संरक्षण कार्यों का तीसरे पक्ष से सत्यापन भी करा लिया गया है।
मंडलायुक्त ने शुक्रवार को यहां एलडीए सभागार में पर्वतीय क्षेत्र सुरक्षा समिति की बैठक ली। उन्होंने सिंचाई विभाग के ईई से कहा कि वह बलिया नाले में झील से हो रहे रिसाव क्षेत्र का आइसोटोपिक सर्वे कराएं। कहा कि शहर में अवैध निर्माण पर पूरी रोक लगाई जाए। इस हेतु कमेटी गठित कर नियमित चेकिंग हो और अवैध निर्माण को तुरंत ध्वस्त किया जाए। उन्होंने झील विकास प्राधिकरण, लोनिवि, नगरपालिका के ईओ से कहा कि वह नालों में कूड़ा, निर्माण सामग्री डालने वालों का चालान करें। उन्होंने नालों से पेयजल लाइनें हटाने, रोस्टिंग से शहर में जलापूर्ति करने, दिसंबर तक सभी पेयजल कनेक्शनों में मीटर भी लगाने को कहा। आयुक्त ने प्राधिकरण सचिव को निर्देश दिए कि शहर में अवैध निर्माण न हो, भूउपयोग न बदले। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि विभिन्न संस्थाओं ने नैनीझील, पहाड़ियों का जो भी सर्वे किया है, उसे संकलित कर अध्ययन किया जाए। बताया कि नैनीताल शहर के जोन एक, जोन दो में निर्माण पूर्णत: प्रतिबंधित है। उच्चस्तरीय समिति के माध्यम से जोन एक, जोन दो की 74 अवैध निर्माण की फाइलें शासन को जांच के लिए भेजी हैं। प्रो. अजय रावत ने शहर में अवैध निर्माण के कारण लुप्त हो चुके नालों को पुनर्जीवित करने, हल्की सामग्री से घर बनाने, प्रो. जीएल साह ने नालों में पानी की रफ्तार कम करने के लिए नालों का ढलान कम करने, राजीव लोचन साह ने झील, नालों में कूड़ा डालने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, गंगा प्रसाद साह ने झील की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु स्थानीय जनता का सहयोग लेने के साथ ही लेक वार्डन की तैनाती करने को कहा। किशन पांडे ने नैनीताल शहर से बाहर जा रहेे नालों के पानी को झील में लाने का सुझाव दिया। डीएन भट्ट ने नालों से पेयजल की लाइनें हटवाने का सुझाव दिया। बैठक में नैनीताल में वाहन पार्किंग की व्यवस्था, कूड़ा निस्तारण, नए पर्यटक स्थलों को विकसित करने के सुझाव भी दिए। बैठक में भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण देहरादून भूपेंद्र सिंह, दिनेश लाल साह, आईआईटी रुड़की के पूर्व प्रोफेसर पीके पांडे, सुदर्शन लाल साह, एम सामंता वैज्ञानिक सीआरबीआई रुड़की, सचिव झील विकास प्राधिकरण श्रीष कुमार, एसई लोनिवि डीएस नबियाल, ईई सीएस नेगी, प्रो. पीसी पंत, प्रो. जीएल साह, वैज्ञानिक सेवाव्रत दास, डीएफओ डीएस मीणा, उपनिदेशक पर्यटन जेसी बेरी आदि थे।