हल्द्वानी। गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से मासूमों की मौत से देश भर में हल्ला मचा हुआ है। कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल का हाल भी कुछ ऐसा ही है। अस्पताल को ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान नहीं हुआ है। कंपनी का अस्पताल प्रशासन पर 40 से 45 लाख रुपये का बकाया है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रदेश सरकार गंभीर नजर नहीं आ रही है। गोरखपुर की घटना के बाद भी कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। सुशीला तिवारी अस्पताल में एक महीने में लगभग तीन से साढ़े तीन हजार आक्सीजन सिलेंडर की खपत होती है। सूत्रों की मानें तो आक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी का अभी भुगतान नहीं है। कंपनी का लगभग 40 से 45 लाख रुपये का बकाया है। बकाया भुगतान न होने की स्थिति में कंपनी आक्सीजन की सप्लाई बंद कर सकती है। कंपनी के आक्सीजन की सप्लाई बंद करने से संकट गहरा सकता है और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। हालांकि राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा का कहना है कि चार माह का भुगतान जल्द कंपनी को कर देंगे। एक माह के भुगतान की राशि लगभग दस लाख रुपये शेष रह जाएगी। उन्होंने कहा कि कंपनियों का भुगतान चार-पांच माह बाद ही होता है। इस सप्ताह देहरादून जाकर शासन से बजट की मांग करेंगे।
दूसरी ओर बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसबी ओली ने बताया कि 17-18 के लिए 50 लाख रुपये का बजट अभी नहीं आया है। बिजली विभाग, जलसंस्थान समेत अन्य का भुगतान नहीं हो पाया है। बेस अस्पताल में एक माह में लगभग 10 से 15 आक्सीजन सिलेंडर की खपत होती है। बजट न आने के कारण आक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान भी अटका हुआ है। डॉ. ओली ने कहा कि बजट आते ही भुगतान कर दिया जाएगा।
ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी को नहीं हुआ है 40 से 45 लाख रुपये का भुगतान
हर महीने तीन से साढ़े तीन हजार सिलेंडर की होती है खपत
सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल को भी बजट का इंतजार