हल्द्वानी। पहाड़ के राजस्व गांवों में पटवारियों को पुलिस संबंधी कार्य करने को लेकर शासन से अभी तक किसी तरह के कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। इसके चलते राजस्व निरीक्षक असमंजस की स्थिति में हैं। राजस्व क्षेत्रों में पटवारी फिलहाल पुलिस कार्य नहीं कर रहे हैं।
बता दें कि 12 जनवरी 2018 को नैनीताल हाईकोर्ट में जस्टिस राजीव शर्मा और आलोक सिंह की खंडपीठ ने टिहरी जिले में हुई दहेज हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए राजस्व पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए सरकार को छह माह के भीतर इस व्यवस्था को खत्म करने के निर्देश दिए थे।
बृहस्पतिवार को छह माह का वक्त पूरा हुआ तो शुक्रवार से पर्वतीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक एवं राजस्व सेवक संघ ने प्रदेश भर में पुलिस कार्यों को करना बंद कर दिया। इससे प्रदेश के 1216 राजस्व क्षेत्रों में पुलिसिंग कार्य प्रभावित हो गया।
कहा जा रहा है कि प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ दो माह पहले ही सुप्रीम कोर्ट से स्टे प्राप्त कर लिया है, लिहाजा पटवारियों को पहले की ही तरह राजस्व गांवों में पुलिस कार्य जारी रखने होंगे। इस मामले में पर्वतीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक और राजस्व सेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विजय पाल सिंह मेहता का कहना है कि शासन से इस संबंध में उन्हें कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं, जिसके चलते इस मामले में असमंजस की स्थिति है। उन्होंने दावा किया कि कोई भी पटवारी फिलहाल पुलिस कार्य नहीं कर रहा है।