हल्द्वानी। राजकीय महाविद्यालयों में निर्धारित सीटों से अधिक दाखिले किए जाने की याद उच्चशिक्षा निदेशालय को अब आई है। निदेशालय ने राज्य के सभी राजकीय महाविद्यालयों से स्नातक और परास्नातक में निर्धारित सीटें, छात्र संख्या, शिक्षकों की तैनाती समेत 12 से अधिक बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। महाविद्यालयों से यह भी पूछा गया है कि निर्धारित मानक से अधिक दाखिले क्यों और किसके आदेश पर किए गए। इस बिंदु का जवाब देने को लेकर हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज प्रशासन के पसीने छूट रहे हैं।
उच्चशिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों से 12 बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इसमें सबसे अधिक फोकस छात्र संख्या पर किया गया है। चार माह बाद महाविद्यालयों में नये शिक्षा सत्र के तहत दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने पर अब निदेशालय को गत वर्ष अधिक दाखिले होने की सुध आई है। महाविद्यालयों के प्राचार्यों से पूछा गया कि कॉलेज में किस कक्षा में किस विषय में कितनी सीटें निर्धारित थी तथा कितने दाखिले किए गए। कितने पीरियड पढ़ाए जा रहे हैं, प्राध्यापकों के कितने पद स्वीकृत हैं, कितने रिक्त हैं। इसको लेकर कई महाविद्यालयों के प्राचार्य खासे परेशान हैं।
उच्चशिक्षा मंत्री के निर्देश पर हुए थे अधिक प्रवेश
हल्द्वानी। कुमाऊं में छात्र संख्या के हिसाब से सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज में पिछले वर्ष सत्र 2017-18 में मानक से अधिक प्रवेश उच्चशिक्षामंत्री डा. धनसिंह रावत के निर्देश पर हुए थे। पिछले वर्ष छात्रसंघ चुनाव से कुछ दिन पहले सितंबर में बीए, बीकॉम और बीएससी प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश को लेकर हंगामा हुआ था और छात्रसंघ चुनाव में अपना नाम चमकाने के लिए कुछ छात्रनेताओं ने तेल छिड़क लिया था। बाद में तत्कालीन उच्चशिक्षा निदेशक डा. बीसी मेलकानी द्वारा एमबीपीजी कालेज को भेजे आदेश में इस बात का उल्लेख किया था कि उच्चशिक्षामंत्री के मौखिक निर्देश हैं कि जितने भी विद्यार्थियों के प्रवेश आवेदन फार्म जमा हैं सभी को दाखिला दे दिया जाए। मंत्री से हरी झंडी मिलने के बाद सभी को दाखिला दे दिया गया था। इसका पूरा फायदा छात्रसंघ चुनाव में विद्यार्थी परिषद ने उठाया था।