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पदमपुरी चिकित्सालय की स्वास्थ्य सुविधाएं राम-भरोसे

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भीमताल (नैनीताल)। पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं की लाचार व्यवस्था के चलते यहां अस्पतालों में ओपीडी में आने वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के पैतृक गांव पदमपुरी के राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के भी यही हाल हैं। धारी ब्लॉक के पदमपुरी गांव के अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव इस कदर है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा है।
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पदमपुरी संयुक्त चिकित्सालय में रोजाना धारी, धानाचूली, पहाड़पानी, गुनियालेख, पलड़ा, अलचौना, चांफी, नाई, भीड़ापानी आदि गांवों से 30 से 35 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं, तीन से चार मरीज भर्ती रहते हैं। सालभर ओपीडी में मरीजों की संख्या 250 से 300 रहती है। इनमें सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त, पीलिया, डायरिया, हाथ-पैर फ्रैक्चर, गर्भवती आदि मरीज आते हैं। वहीं अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के न होने, एक्सरे मशीन के खराब होने, अल्ट्रासाउंड मशीन, पैथोलॉजी लैब न होने से मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। इस अस्पताल में होम्योपैथिक डॉ. रजनी भट्ट, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. विजय नारंग, फिजिशियन डॉ. हिमांशु कांडपाल, डॉ. कुमोद पंत, दो फार्मेसिस्ट हैं।


एक्सरे मशीन नौ साल से खराब
एक्सरे टेक्नीशियन कमला आर्या ने बताया कि अस्पताल में नौ साल से एक्सरे मशीन खराब है। ओपीडी में सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को अन्यत्र इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। सालों से खराब पड़ी एंबुलेंस की जगह दूसरी एंबुलेंस, चौकीदार, डीजी हेल्थ पदों पर नियुक्ति की मांगें सीएमओ और अधिकारियों के सामने रखी जा चुकी हैं, लेकिन कोई भी मांग पूरी नहीं हो सकी।
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आश्वासन तो दिया, पर पूरा नहीं किया
फार्मेसिस्टों ने बताया अस्पताल में काफी दवाइयां उपलब्ध हैं। गुनियालेख के ग्राम प्रधान संजय पांडे, धीरज कुमार सरना ने बताया कि अस्पताल में सुविधाओं को लेकर उन्होंने 2017 में अस्पताल में ग्रामीणों के साथ एक दिनी धरना दिया था। तब सीएमओ ने एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन, लैब, खाली पदों की मांग को जल्द पूरा करने की बात कही थी, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। संजय पांडे ने फरवरी में इन मांगों को लेकर बेमियादी धरना देने की बात कही है।
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अस्पताल में उपलब्ध, वांछित संसाधनों की सूचना शासन को कई बार दी जा चुकी है। जल्द ही इन समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।
- डॉ. डीआर टम्टा, एसीएमओ नैनीताल।
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