हल्द्वानी। सभी धर्म-मजहब इंसानियत और मुल्क से मोहब्बत का पैगाम देते हैं। एक-दूसरे की मदद करने और हमदर्दी की शिक्षा देते हैं। मुल्क की तरक्की में कोई भी धर्म और उसके मानने वाले बाधक नहीं बनते, बल्कि सहायक साबित होते हैं। यह विचार जमियत उलेमा-ए-हिंद की ओर से रविवार को मदरसा अहया-उल-उलूम में आयोजित कौमी एकता सम्मेलन में बुद्धिजीवियों ने व्यक्त किए।
उत्तराखंड हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश इरशाद हुसैन की सरपरस्ती में आयोजित सम्मेलन का आगाज कुरान की तिलावत से किया गया। ईसाई विद्वान फादर ज्ञानमसीह ने कहा कि एकजुटता से ही विकास की उम्मीद की जा सकती है। इसकी शुरुआत अपने घर से करनी होगी। सभी धर्म समुदाय के लोगों को एक मंच पर आकर मुल्क और इंसानियत की तरक्की के लिए मंथन करने की जरूरत है।
संस्कृत महाविद्यालय के डॉ. नवीन चंद जोशी ने कहा कि पहले हम मनुष्य हैं, उसके बाद अपने-अपने धर्मों को मानने वाले है। सभी धर्म एक-दूसरे की मदद का संदेश देते है। गुुरुद्वारा के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरीक सिंह ने कहा कि धर्म के मानने वालों को देशद्रोही कहना कतई दुरुस्त नहीं है, क्योंकि सभी धर्मों का मूल मंत्र इंसानियत है। धर्म के जरिए ही इंसानियत जिंदा है।
मोहम्मद यूसुफ एडवोकेट ने कहा कि जो लोग धार्मिक हैं, वे ही दूसरे धर्मों का एहतराम करने वाले और मुल्क से मोहब्बत करने वाले हैं। कौमी एकता से ही मुल्क की तरक्की मुमकिन है। व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री अमरजीत सिंह चड्ढा ने कहा कि व्यापार मंडल में सभी धर्मों के लोग समान रूप से प्रतिनिधित्व करते हैं। सम्मेलन में मुक्त विवि के प्रो. आरसी मिश्रा, अब्दुल हक, गोविंद बगड़वाल आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना अब्दुल रऊफ और संचालन मौलाना मुकीम कासमी ने की। इस मौके पर मौलाना सलमान, प्रमोद कुमार, विक्रम मसीह, डॉ. अदनान सिद्दीकी, रूमी वारसी, खालिद हुसैन, अब्दुल हसीब, नासिर हुसैन, इकराम अंसारी आदि मौजूद थे।