हल्द्वानी। सोमवार की शाम चांद के दीदार के साथ माहे रमजान का आगाज हो गया। लोगों ने सामूहिक रूप से तरावीह की नमाज पढ़ी और तड़के सहरी खाकर पहला रोजा रखा। उलमा ने मस्जिदों में रमजान और रोजे की फजीलत बयान की।
अरबी कैलेंडर के माह शाबान के 30 दिन पूरे होने पर नौवें महीने रमजान का आगाज हो गया। इस माह में तीस दिन लगातार रोजे रखे जाते हैं। सोमवार की शाम चांद के दीदार के लिए लोग घरों और मस्जिदों की छतों पर खड़े हो गए। बादलों के झुरमुट से 6 बजकर 52 मिनट पर चांद निकल आया तो लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। एक दूसरे के गले लगकर रमजान के आगाज की मुबारकबाद दी और दुआएं की गईं। मस्जिदों ने चांद का ऐलान होने के साथ ही खुशखबरी दी जाने लगी। रात को इशा की नमाज के बाद शहर और आसपास की सभी मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। जामा मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती शाहिद अली अजहरी ने बताया कि तरावीह पढ़ना और कुरान सुनना सभी के लिए जरूरी है। तरावीह पूरे महीने पढ़ी जानी चाहिए।
चांद के दीदार के साथ माहे रमजान का आगाज
बादलों की ओट से छह बजकर 52 मिनट पर निकला चांद, मस्जिदों में शुरू हुई तरावीह, सहरी खाकर रखा पहला रोजा
दुकानों पर उमड़ी भीड़
हल्द्वानी। चांद के दीदार के बाद दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग सहरी के लिए खरीदारी में जुट गए। ब्रेड, शीरमाल, खजला, फैनी और खानपान की दुकानों पर ज्यादा भीड़ रही।
मस्जिदों में एसी और कूलर का इंतजाम
हल्द्वानी। तरावीह में नमाजियों के लिए मस्जिदों में खास इंतजाम किए गए हैं। उमस भरी गर्मी से निजात दिलाने के लिए एसी और कूलर का इंतजाम किया गया है। बिजली कटौती से बचने के लिए जेनरेटर और इन्वर्टर लगाए गए। साथ ही ठंडे पानी के लिए सभी मस्जिदों में वाटर कूलर का इंतजाम भी किया गया।
सिर पर भीगा तौलिया रखने से नहीं टूटता रोजा
हल्द्वानी। भूलवश खाने पीने या सिर पर भीगा तौलिया रखने से रोजा नहीं टूटता। मस्जिद उमर के पेश इमाम मौलाना मुकीम कासमी ने बताया कि गर्मी की शिद्दत से निजात पाने के लिए रोजेदार सिर या शरीर पर भीगा तौलिया रख सकते हैं, इससे न रोजा टूटेगा और न ही मकरूह होगा।