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किस आधार में शामिल किए गए हमारे गांव

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गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल करने को लेकर भाजपा ग्राम प्रधान से लेकर ग्रामीण विरोध में उतर गए हैं। गौजाजाली दक्षिण ग्राम सभा को नगर निगम शामिल करने के लिए किसी भी मानक का पालन नहीं किया गया। गौजाजाली दक्षिण में 33 परिवार हैं, इसमें से 22 परिवारों का मुख्य रोजगार कृषि और पशुपालन है। इसके बाद भी इसे नगर निगम में शामिल कर दिया गया। ग्रामीणों ने कहा कि शहर से ज्यादा हमारे गांव में सड़क और सफाई की व्यवस्था बेहतर है।
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मानकों की बात करें तो नगर निगम में गांव को शामिल करने के लिए 75 प्रतिशत से कम कृषि भूमि, 25 प्रतिशत से अधिक आबादी की मुख्य आमदनी कृषि पर आधारित नहीं होनी चाहिए। लेकिन गौजाजाली दक्षिण में इन मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को जब इस गांव का जायजा लिया तो पाया कि इस गांव में 33 परिवार हैं, इसमें से 22 परिवारों का मुख्य रोजगार कृषि और पशुपालन है। भाजपा समर्थित ग्राम प्रधान सुरेश जोशी ने कहा कि नगर निगम में उनका गांव किस आधार पर शामिल किया गया, पता नहीं।

ग्रामीणों ने अपनी सड़क दिखाते हुए कहा कि उनके गांव की सड़क नगर निगम से अधिक साफ है। सीवर की उन्हें जरूरत नहीं है। उनके यहां अपने पिट हैं। कूड़ा इतना नहीं होता है कि सड़क पर फेंका जाए। ग्राम सभा की ओर से सोलर लाइट लगाई गई हैं। अब नगर निगम में शामिल होने पर उन्हें सभी चीजों का टैक्स देना होगा।
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सीवर से गंदा पानी घरों के आगे बहता है
नगर निगम में गांव को शामिल करने का हम पुरजोर विरोध करते हैं। हमने अपने प्रयासों से गांव को संवारा है। सीवर लाइन का गंदा पानी घरों के आगे बहता है और यही पानी हमें खेतों में सिंचाई के लिए प्रयोग करना पड़ता है कई बार निगम कर्मियों से शिकायत की मगर उन्होंने एक न सुनी, ऐसे में अगर नगर निगम के अंदर गांव आ जाता है तो गांव की दशा और बदहाल हो जाएगी।
- चंपा मेहरा

हमारा गांव आदर्श बनने वाला था
खेतीबाड़ी, पशुपालन हमारा मुख्य पेशा है ऐसे में हमारे ऊपर कई करों का बोझ और बढ़ जाएगा। निगम के अंतर्गत आने से गांव का विकास प्रभावित हो जाएगा, हमारा गांव आदर्श गांव बनने के कगार पर है काश की अधिकारियों ने एक बार गांव का सर्वे कर ग्रामीणों की राय ली होती।
सूरज जोशी

अधिकारियों को काम कराने के लिए देने होंगे रुपये
जो कार्य लोगों के हफ्ते भर में हो जाते थे अब वहीं काम पूर्ण होने पर कई दिन लगेंगे। अधिकारियों को काम करवाने के बदले में रुपये भी देने होंगे। तमाम करों के दायरों में रह कर भी सुविधाएं मिलें यह कहना मुश्किल है।
राधा जोशी

किसानों पर पड़ेगा करों का बोझ
छोटे से गांव में 33 लोगों का परिवार रहता है, गांव में 70 प्रतिशत कृषि होती है। निगम में शामिल किए जाने से तमाम कर झेलने पडे़ंगे ऐसे में कहां से छोटे काश्तकार इन करों को कहां से वहन करेगा।
सुरेश जोशी ग्राम प्रधान गौजाजाली दक्षिण

नगर निगम में बस गम ही गम
नगर निगम अपने वार्डों में ही सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। वार्डों से अधिक सुविधाएं गांव में हैं। वार्ड नंबर 14 में न तो गलियों से कूड़ा उठता है और न ही गलियों में सीवर लाइन बिछी है। लोगों के घरों का सीवर नालियों में बह रहा है। इतना जरूर है कि प्रकाश की व्यवस्था है। लोगों का आरोप है कि उनके वार्ड में सफाई कर्मियों की बहुत कमी है। सफाई कर्मचारी गलियों में आते ही नहीं हैं।

गंदे नाले को ढकने का काम नहीं हुआ
ढाई साल होने को आए मगर आज तक निगम द्वारा गंदे नाले का कवरिंग कार्य पूर्ण नहीं हो पाया, गलियां गंदगी से पटी पड़ी हैं, साफ-सफाई के लिए निगम की ओर से कोई भी कर्मी नहीं आता।
मो.जमील

हम लोग खुद से ही साफ-सफाई का कार्य करते हैं त्योहार पर सब लोग स्वयं ही एकत्र हो कर सफाई करते हैं, नाले की बदबू से दम घुटता है।
अंजुम

कूडे़ की गाड़ी कभी-कभी कूड़ा उठाने आ जाती है मगर फिर भी गंदगी इस कदर है कि हवा में भी बदबू शुमार रहती है जिसकी वजह से खिड़की बंद ही रखते हैं।
मो. यूनुस मियां

कूडे़ की समस्या एक विकट समस्या है। गलियों में पैदल चलना दूभर हो जाता है। तंग गलियों में पटी गंदगी से मच्छर और बदबू पनप रही है। निगम कर्मियों को कई बार पार्षद आदि द्वारा इस मामले से अवगत करवाया मगर किसी ने सुध नहीं ली है।
मो. नाजिर

नगर निगम के पास संसाधन की कमी है। धीरे-धीरे व्यवस्थाएं सुधर रही हैं। हर वार्ड में घर-घर कूड़ा एकत्र करना शुरू होने जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र जो नगर निगम में शामिल हुए हैं। वार्ड बनने के बाद यहां भी सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। - हरबीर सिंह, नगर आयुक्त
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