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राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को भी लील चुका खेल मैदान का अभाव

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। खेल मैदान के अभाव ने क्षेत्र के होनहार खिलाड़ियों के भविष्य पर ही प्रश्न चिह्न नहीं लगाए, वरन अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिताओं को भी लील लिया। इसी कारण नगर की प्रमुख बिहारी लाल साह मेमोरियल अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता भी 80 के दशक में खेल मैदान के अभाव में ही दम तोड़ गई। इसके बाद न तो शासन ने दिलचस्पी दिखाई और ना ही जनप्रतिनिधियों ने। यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता 1971 में यहां नरसिंह मैदान में शुरू हुई थी। वेस्टर्न रेलवे मुंबई, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित देश की नामचीन टीमें यहां आती थीं।
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राष्ट्रीय प्रतियोगिता का पहला खिताब 1971 में वेस्टर्न रेलवे मुंबई की टीम ने यूपी पुलिस सीतापुर की टीम को हराकर जीता था। 1972 में हरियाणा राज्य विद्युत बोर्ड चंडीगढ़ ने आर्मी मेडिकल कोर को हराया। तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष जनरल टीएन रैना ने पुरस्कार बांटे थे। 1973 में ईएमई भोपाल ने एएमसी को हराया। तब पहली बार केआरसी ने यह प्रतियोगिता नरसिंह मैदान के बजाए सोमनाथ मैदान में कराई। रक्षा राज्यमंत्री जेबी पटनायक ने खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया था। 1974 में कोर ऑफ सिग्नल जालंधर की टीम ने शक्ति क्लब जयपुर को हराया। तब यूपी के तत्कालीन सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा प्रतियोगिता का उद्घाटन करने पहुंचे।

1975 में यूपी सचिवालय लखनऊ ने यह खिताब जीता था। हॉकी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष अगस्त लाल साह ने बताया कि 1976 से लेकर 1978 तक केआरसी ने पुनर्मिलन समारोह के दौरान नरसिंह मैदान में यह प्रतियोगिता कराई। उन्होंने बताया कि कूशा, लाकरा, सैय्यद अली, यूपी के मोहन सिंह आदि इसी प्रतियोगिता में खेलकर राष्ट्रीय टीम में चुने गए। प्रतियोगिता के लिए क्रीड़ा संघ के महासचिव और पूर्व कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष हेम चौधरी आदि भी भरपूर सहयोग करते थे।
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