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कबूरती देवी के निधन को अपूर्णनीय क्षति बताया

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कबूतरी देवी के निधन पर शोक - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। उत्तराखंड की प्रथम लोकगायिका कबूतरी देवी को लोक कलाकारों, लोक गायकों, रंग कर्मियों, संस्कृति कर्मियों, समाजसेवियों समेत विभिन्न संगठनों ने श्रद्धांजलि दी।
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यहां लोनिवि विश्राम गृह परिसर में रविवार शाम हुई शोकसभा में वक्ताओं ने कहा कि वह उत्तराखंड की पहली पारंपरिक लोकगायिका थी। उनके निधन से लोक संस्कृति को महान क्षति हुई है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। श्रद्धांजलि सभा में कबूतरी देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित को दो मिनट का मौन रखा गया। वक्ताओं ने वर्तमान महंगाई को देखते हुए संस्कृति विभाग से लोक कलाकारों की पेंशन राशि बढ़ाए जाने की मांग की। श्रद्धांजलि सभा में लोकगायक प्रह्लाद मेहरा, गोविंद दिगारी, पवन कार्की, दीपा नगरकोटी, राकेश खनवाल, नंदकिशोर नंदू, घनश्याम भट्ट ‘घनदा’, निर्माता निर्देशक विक्की योगी, निर्माता निर्देशक जितेंद्र मर्तोलिया, मदन जलाल, मंजू जानू, प्रताप चौहान, देवेंद्र जौहरी, गोकुल फर्त्याल, विनोद कुमार, हिमांशु आर्या, डॉ. नीरज वार्ष्णेय, मंजू पांडे, नीरज निहाल, रेखा रंगीली, हेमा हरबोला, हरीश पांडे, रितेश जोशी, गौरी दत्त कांडपाल आदि थे। इधर, देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल ने भई लोकगायिका के निधन पर शोक जताया। इनमें देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर, जीएस रावत, कमल मेहरा, राजेंद्र सिंह बिष्ट, मानव विकास सेवा संस्थान के सचिव किरन भट्ट, महेश चंद्र, शिखा सिंह, श्वेता नगरकोटी, स्नेहा गोयल, प्रिया भटनागर, निहारिका टम्टा, देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष जीवन सिंह कार्की आदि थे।

कबूतरी देवी को लोककलाकारों की श्रद्धांजलि
हल्द्वानी। प्रसिद्ध लोकगायिका स्वर कोकिला कबूतरी देवी के निधन से रंगकर्मी, लोककलाकार, लोकगायक, संस्कृति प्रेमियों में मायूसी है। सभी ने कबूतरी को पारंपरिक लोकगायकी की सुर साम्राज्ञी बता उनके निधन पर शोक जताया।
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- उनको देखना, उनके साथ खड़े होना ही हमारे लिए गर्व की बात थी। उनका आत्मविश्वास देखने लायक था। वह उत्तराखंडी लोकगायकी की मुखिया थीं।
- हेमंत पांडे, सिने अभिनेता

कुमाऊंनी संगीत की दुनिया में पहली महिला लोकगायिका थीं। वह अनूठी आवाज की धनी थीं। उनके पति जिन्हें नेताजी कहते थे, वह उन्हें गायकी के लिए प्रेरित करते थे। द्वाराहाट के बिखौती मेले में उनके साथ एक मंच पर गाने का अवसर मिला था।
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- सुरेश प्रसाद सुरीला, लोकगायक।

कबूतरी देवी कुमाऊंनी लोकगीतों को आगे बढ़ाने का काम कर रही थीं। पारंपरिक लोकगायन में उनके जैसा गायक नहीं देखा।
- नरेंद्र सिंह टोलिया, निदेशक चांदनी इंटरटेनमेंट।
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